नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 168 लोगों की मौत, 1100 से अधिक लापता, 133 भारतीय भी शामिल
नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़ के नागरिकों की सहायता के लिए सरकार ने की हेल्पलाइन नम्बर जारी
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में 168 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 41 घायल लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। नेपाल पुलिस ने गुरुवार सुबह इसकी पुष्टि की है। नेपाल में 165 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई, जबकि 1100 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। वहीं, भारत ने भी कई टुकड़ियों को हाई अलर्ट पर रखा है और सीमा पर नदियों के जल स्तर की निगरानी की जा रही है।
बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर आ गया था। तेज बहाव में घर, गाड़ियां और सरकारी ढांचे बह गए। शुरुआत में माना जा रहा था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक चीन की तरफ ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा था।
इसी लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। इसके बाद ल्हेंदे नदी से पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा, जिससे बाढ़ आई। बहाव इतना तेज था कि लोगों और मलबे को करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बहा ले गया, जहां अब तक 33 शव बरामद किए गए हैं। जिससे मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका है।
इस हादसे में सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत से आए कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री भी शामिल हैं। राहतकर्मी खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल में लापता लोगों में 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं, जिनमें 133 भारतीय और 37 NRI भी हैं।
नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़ के नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन जारी
प्रदेश के नागरिक अथवा उनके परिजन सहायता एवं आवश्यक जानकारी के लिए आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन 1070 तथा दूरभाष +91-771-2223471 पर संपर्क कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार अपने प्रत्येक नागरिक के साथ खड़ी है। फंसे नागरिकों की सुरक्षित वापसी एवं आवश्यक सहायता के लिए सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है।




