वर्तमान गृहमंत्री विजय शर्मा के गृह जिले कवर्धा के एसपी ने सीएम विष्णुदेव साय व मुख्य सचिव को लिखा पत्र
पुलिस महकमे में हुवे पदोन्नति को लेकर लगाये गंभीर आरोप, पुलिस महकमे में मचा खलबली
उनका दावा है कि उनके मौलिक अधिकारों का हो रहा हनन
छत्तीसगढ़ में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक अधिकारी ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर और भेदभावपूर्ण तरीके से पदोन्नति और प्रवर श्रेणी वेतनमान से वंचित किया जा रहा है। उनका दावा है कि यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
यह कहीं और स्थान का नही बल्कि छत्तीसगढ़ के वर्तमान गृहमंत्री विजय शर्मा के गृह जिले कवर्धा के एसपी ने सीएम विष्णुदेव साय को लेटर लिखा है। उनके लेटर में पुलिस महकमे में पदोन्नति को लेकर एक गंभीर आरोप लगाए गए है। लेटर सामने आये के बाद राज्य की सियासत एक बार फिर से तेज हो गई है। 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई ने सीएम को लेटर लिखकर अपने साथ हुए अन्याय, भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की पीड़ा व्यक्त की है। धर्मेंद्र सिंह छवई ने कहा कि राज्य में कुछ आईपीएस अधिकारियों, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले जांच के अधीन हैं, उन्हें पदोन्नति और उसके बाद के लाभ दिए गए हैं।
लेटर में धर्मेंद्र सिंह ने लिखा है कि नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर प्रमोशन नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी की गई पदोन्नति सूचियों 10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025 में उनके नाम पर विचार किया गया, लेकिन उन्हें प्रमोशन नहीं दिया।
2012 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी छवई ने अपने करियर की शुरुआत राज्य पुलिस सेवा में की थी और बाद में उन्हें आईपीएस में पदोन्नत किया गया। उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि उन्हें न तो प्रवर श्रेणी वेतनमान दिया गया है और न ही उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर पदोन्नत किया गया है, जबकि उसी 2012 बैच के अन्य अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि मेरे साथ भेदभाव किया जा रहा है।’
पत्र में, अधिकारी ने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा कई मौकों पर उनके पदोन्नति की सिफारिश की गई थी लेकिन भोपाल में लोकायुक्त के पास जांच के एक लंबित मामले का हवाला देते हुए इसे रोक दिया गया।
उन्होंने राज्य में तैनात चार आईपीएस अधिकारियों का नाम लिया है और कहा है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले जांच के अधीन हैं या अदालत की मंजूरी के लिए लंबित हैं, लेकिन उन्हें पदोन्नति और उसके बाद के लाभ दिए गए हैं, जबकि उन्हें उसी तरह का लाभ नहीं दिया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के 15 जनवरी, 1999 के दिशानिर्देशों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक आईपीएस अधिकारी को पदोन्नति से तभी वंचित किया जा सकता है जब वह निलंबित हो, आरोप पत्र के बाद विभागीय कार्यवाही का सामना कर रहा हो, या अधिकारी के विरूद्ध न्यायालय में आपराधिक प्रकरण लंबित हो। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया, ‘इनमें से कोई भी शर्त मेरे मामले पर लागू नहीं होती है, फिर भी मेरी पदोन्नति जानबूझकर रोकी गई है।’
उन्होंने दावा किया कि राज्य में महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाले से संबंधित मामलों का सामना कर रहे कम से कम तीन आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है, जिनकी वर्तमान में सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है। इसी तरह आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा रायपुर में एक अन्य आईपीएस अधिकारी के खिलाफ दर्ज मामले में न्यायालय में 04/07/2024 को अंतिम रिपोर्ट पेश किया गया है, जिस पर अभी न्यायालय विचार कर रहा है। इस मामले में अधिकारी को सभी लाभ दिए गए हैं।
छवई ने दावा किया कि उनके साथ दोहरी नीति अपनाते हुए उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। इसे संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन बताते हुए छवई ने कहा कि उन्होंने न्याय के लिए पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा है।



