अनावश्यक आवाजाही को कम करने और अदालती कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए अब सुनवाई वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से:-हाई कोर्ट

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अनावश्यक आवाजाही को कम करने और अदालती कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए अब सुनवाई वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से:-हाई कोर्ट

अनावश्यक आवाजाही को कम करने और अदालती कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए अब सुनवाई वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से:-हाई कोर्ट

हाईकोर्ट और जिला अदालतों के कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की मिली सुविधा



बिलासपुर। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में जारी सर्कुलर के मद्देनजर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सुचारू न्यायिक कामकाज और सरकारी संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपायों की शुरुआत की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन में इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रशासन द्वारा जारी सर्कुलर नंबर 143 एमआइएस के तहत ग्रीष्मकालीन अवकाश 2026 के लिए विशेष प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, ताकि न्याय की प्रक्रिया भी बाधित न हो और संसाधनों की भी बचत की जा सके। अवकाश अवधि के दौरान अनावश्यक आवाजाही को कम करने और अदालती कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए उच्च न्यायालय में मामलों की सुनवाई आमतौर पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। हालांकि, जो अधिवक्ता अपरिहार्य कारणों से वर्चुअल मोड में शामिल नहीं हो सकते, वे भौतिक रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं। इसके साथ ही न्यायालय भी जहां उचित समझे, मामलों की सुनवाई फिजिकल मोड में करने का निर्देश दे सकते हैं।

कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम

हाईकोर्ट और जिला अदालतों के कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा सकती है। हालांकि रोटेशन व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित रहें, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। घर से काम करने वाले कर्मचारियों को फोन और अन्य सरकारी संचार माध्यमों पर हर समय उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा।

फ्यूल बचाने के लिए जज-अधिकारी करेंगे कार पूलिंग

फ्यूल की बचत और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए हाईकोर्ट ने नई पहल की है। इसके तहत राज्य के न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अफसरों और मंत्रालयीन कर्मचारियों के लिए व्हीकल पूलिंग यानी साझा वाहन व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट के जजों से भी आपस में कार-पूलिंग करने का आग्रह किया गया है।

रजिस्ट्री की तैयारियों के निर्देश

इन सभी व्यवस्थाओं को बिना किसी बाधा के लागू करने के लिए हाईकोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सहित अन्य जरूरी तकनीकी इंतजाम दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट प्रशासन का कहना है कि रमेश सिन्हा के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तकनीक, आपसी समन्वय और संस्थागत जिम्मेदारी के जरिए आम जनता के लिए न्याय सुलभ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम देशहित में संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

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