चाकूबाजी की 120 घटनाएं दर्ज, जिसमें 7 लोगों की हत्या, 122 घायल, हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान
हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच ने मुख्य सचिव, डीजीपी, आईजी बिलासपुर, कलेक्टर और एसपी बिलासपुर को बनाया पक्षकार
मामूली विवादों पर भी चाकूबाजी चिंताजनक, बेचने और खरीदने वाले दोनों पर करें कार्रवाई
हाईकोर्ट ने प्रदेश के शहरों में दुकानों व ऑनलाइन डिजाइनर और बटनदार चाकूओं की बिक्री व चाकूबाजी की घटनाओं पर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है। हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच ने मुख्य सचिव, डीजीपी, आईजी बिलासपुर, कलेक्टर और एसपी बिलासपुर को पक्षकार बनाया है। साथ ही गृह विभाग के प्रमुख सचिव को भी शामिल करते हुए उनसे व्यक्तिगत शपथपत्र पर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, ये बटनदार, डिजाइनर चाकू कोई सब्जी काटने के लिए तो लेता नहीं होगा, इसकी गंभीरता को समझिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि आपके पास आर्म्स एक्ट भी है तो फिर इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
7 महीने में चाकूबाजी के 120 केस, 7 मर्डर व 122 घायल
बिलासपुर में सिर्फ जनवरी से जुलाई 2025 के बीच चाकूबाजी की 120 घटनाएं दर्ज हुईं हैं, जिसमें 7 लोगों की हत्या हो गई। जबकि, 122 लोग घायल हुए। लगातार हो रही वारदातों के बावजूद रसोई के चाकू और ओपनर के नाम पर भी घातक हथियार खुलेआम बेचे जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि मामूली विवादों पर भी चाकूबाजी जैसी गंभीर घटनाएं हो रही हैं, जो चिंताजनक है।
ऑनलाइन और दुकानों से आसान उपलब्धता
कोर्ट ने कहा कि शहर में चाकू आसानी से उपलब्ध हैं, चाहे वह स्थानीय दुकानों से हों या ऑनलाइन वेबसाइटों से। इस वजह से युवाओं और अपराधियों के बीच चाकू रखने और इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हालांकि पुलिस ने शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की है, लेकिन समस्या पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए ज्यादा प्रभावी रणनीति की जरूरत है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने पूछा कि, ऑनलाइन व खुलेआम ये खतरनाक चाकू कैसे बिक रहे हैं, बेचने और खरीदने वाले दोनों पर कार्रवाई करें।
सरकार ने की कार्रवाई, पर जरूरत सख्त कदमों की
महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भरत और उप-महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि राज्य ने ऑनलाइन चाकू बिक्री के खिलाफ कार्रवाई की है। इसके बावजूद, कोर्ट का मानना है कि गृह विभाग को इस पर स्पष्ट और ठोस योजना बनाकर अमल करना होगा।
हाईकोर्ट बोला- ढिलाई नहीं बरती जा सकती
चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह मामला सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती।
अगली सुनवाई 25 अगस्त को
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है और तब तक सभी संबंधित अधिकारी अपने-अपने जवाब दाखिल करेंगे। उम्मीद है कि इस सुनवाई में शहर में चाकूबाजी रोकने के लिए कड़े कदम तय होंगे।