छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल से होगी नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी, स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए होगा अहम कदम साबित

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छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल से होगी नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी, स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए होगा अहम कदम साबित

छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल से होगी नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी, स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए होगा अहम कदम साबित 

शादी, जन्मदिन पार्टी में 100 से अधिक लोग शामिल होने पर तीन दिन पहले स्थानीय निगम या पालिका को देनी होगी इसकी लिखित सूचना

सूचना नहीं दी गई और आयोजन स्थल पर गंदगी मिली, तो आयोजक पर लगेगा भारी जुर्माना


छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल से नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी लागू होने जा रही है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम साबित होगी। नए नियमों के मुताबिक यदि घर या किसी निजी स्थान पर शादी, जन्मदिन या इस तरह का कोई और समारोह करते हैं और 100 से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं, तो आयोजन के तीन दिन पहले स्थानीय निगम या पालिका को इसकी लिखित सूचना देनी पड़ेगी। यह नियम इसलिए लाया गया है ताकि अचानक पैदा होने वाले भारी कचरे के निपटान की पूर्व व्यवस्था की जा सके। यदि सूचना नहीं दी गई और आयोजन स्थल पर गंदगी मिली, तो आयोजक पर भारी जुर्माना लगेगा।

इस पॉलिसी में सबसे कड़ा प्रावधान ‘ऑन द स्पॉट फाइन’ का है। नए नियमों के अनुसार, कचरे को गलत तरीके से फेंकने या सूचना न देने पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना की राशि 500 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक हो सकती है। यह जुर्माना स्थानीय निकाय के उपनियमों के अनुसार तय होगा।

केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियमों को अधिसूचित किया है, जो 2016 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। ये नए नियम स्वच्छ भारत अभियान को मजबूत बनाने, कचरे के स्रोत पर पृथक्करण को अनिवार्य बनाने और लैंडफिल पर निर्भरता कम करने पर केंद्रित हैं।

छत्तीसगढ़ के 193 नगरीय निकायों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2016 लागू है। प्रदेश के नगरीय निकाय अभी 2016 के नियमों और प्रावधानों को ही ठीक से लागू नहीं कर पाए हैं। अब 2026 के नियम लागू होने जा रहे हैं। इसमें एक हिस्सा सामाजिक आयोजनों से जुड़ा होगा। 

एसडब्ल्यूएम के बारे में वो सब जो आपको जानना चाहिए

घर का कचरा फेंकने का नया तरीका क्या है? 
सॉलिड वेस्ट मैनेनमेंट यानी एसडब्ल्यूएम : अब 2 नहीं, बल्कि 4 बाल्टी जरूरी होंगी।
1.गीला कचरा –रसोई का कचरा, भोजन अवशेष, फल-सब्जियों के छिलके आदि, इसे कंपोस्ट या बायोमेथेनेशन के लिए भेजा जाएगा।
2.सूखा कचरा – प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच आदि। इसे रिसाइक्लिंग के लिए मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी में भेजा जाएगा।
3.सैनिटरी कचरा – इस्तेमाल किए डायपर, नैपकिन, टैम्पोन आदि. इन्हें सुरक्षित रूप से लपेटकर अलग रखना होगा।
4.विशेष देखभाल कचरा- बल्ब, बैटरी, दवाइयां, पेंट के डिब्बे आदि. इन्हें केवल अधिकृत एजेंसियों को सौंपा जाएगा। मिक्स देने पर गाड़ी वाला कचरा नहीं उठाएगा।

पार्टी की सूचना निगम को क्यों देनी होगी?
हां, 100+ लोगों के आयोजन से कचरा ज्यादा निकलता है। सूचना देने से निगम अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध करा सकेंगे। ‘जीरो-वेस्ट’ आयोजन तय करना आयोजक की जिम्मेदारी है।

क्या सोसायटियों को अपना कचरा खुद ठिकाने लगाना होगा?
 हां, 5,000 वर्ग मीटर से बड़े परिसरों को अपने गीले कचरे से खाद बनाने की मशीन परिसर में लगानी होगी। निकाय उनके यहां से केवल सूखा कचरा उठाएगा।

सड़क किनारे चाट, पकौड़े, सब्जी आदि बेचने वाले वेंडरों को अब अपने काम के बाद कचरा वहां नहीं छोड़ने की अनुमति होगी। हर वेंडर को अपने पास डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा, और जमा कचरा निगम के निर्धारित डिपो या वाहन में ही डालना होगा।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता ने इसे बताया तुगलकी फरमान

वहीं इस नियम पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इसे तुगलकी फरमान बताया है। उन्होंने कहा कि बिना जानकारी ज्यादा मेहमान बुलाने और आयोजन से कचरा फैलाने पर जुर्माना का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम की सूचना तीन दिन पहले देने की अनिवार्यता की गई है। सरकार का यह निर्णय अव्यवहारिक है। सरकार को निर्णय तत्काल वापस लेना चाहिए।

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