छत्तीसगढ़ सहित देश में जल्द ही सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर एकीकृत होकर सिर्फ डायल-112 के जरिए होंगे संचालित
सभी तरह की आपातकालीन मदद के लिए 112 पर फोन, केवल 5 राज्यों में ही पूरा हुआ काम
छत्तीसगढ़ सहित देश में जल्द ही सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर एकीकृत होकर सिर्फ डायल-112 के जरिए संचालित होंगे। इसके लिए तैयारी शुरू हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 3 महीने में डायल-100, 101, 102, 108, 1033, 1091 समेत सभी आपातकालीन नंबरों को 112 में मर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्यों से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।
सभी तरह की आपातकालीन मदद के लिए 112 पर फोन, केवल 5 राज्यों में ही पूरा हुआ काम
2019 में शुरू की गई 112 हेल्पलाइन का मकसद था कि आपातकालीन स्थिति में अलग-अलग नंबर याद रखने की झंझट खत्म हो जाए। पुलिस, आग या एंबुलेंस के लिए अलग-अलग नंबर रखने के बजाय, अब सिर्फ एक ही नंबर डायल करना होता है। यह अमेरिका के 911 नंबर जैसा ही है। लेकिन एक पेंच है। अभी सिर्फ 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों—दिल्ली, केरल, गुजरात, हरियाणा और लक्षद्वीप—में ही सभी आपातकालीन सेवाओं को 112 से जोड़ दिया गया है। वहीं उत्तरप्रदेश में लगभग कार्य पूर्ण हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में कवायद तेज हो गई है। हाल ही में गृह विभाग के अधिकारियों ने डायल-112 में इमरजेंसी कॉल को एकीकृत करने पर बैठक की। इसके लिए विस्तृत एक्शन प्लान बन रहा है। प्रदेश में फिलहाल डायल-112 की करीब 400 और मेडिकल इमरजेंसी 108 की करीब 375 गाड़ियां संचालित हैं। पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता के लिए पहले से डायल-112 से कॉल दर्ज किए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब देशभर में सभी आपातकालीन सेवाओं के लिए केवल डायल-112 को एकीकृत इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर बनाया जाएगा। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर अलग-अलग इमरजेंसी नंबरों को डायल-112 में मर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी राज्यों से इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में यह एकीकृत प्रणाली पहले से संचालित हो रही है।
रायपुर में शुरू हुई इमरजेंसी सेवाओं के एकीकरण की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। हाल ही में गृह विभाग के अधिकारियों ने डायल-112 के साथ विभिन्न आपातकालीन सेवाओं के एकीकरण को लेकर बैठक की, जिसमें विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।
प्रदेश में वर्तमान में डायल-112 की लगभग 400 और मेडिकल इमरजेंसी सेवा 108 की करीब 375 गाड़ियां संचालित हैं। फिलहाल पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता के लिए डायल-112 के जरिए कॉल दर्ज की जाती हैं, लेकिन अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर होने के कारण कई बार लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सभी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर प्रतिक्रिया समय को कम करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिए ये निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से कई बार उनकी जान चली जाती है। इसलिए ट्रॉमा केयर तक त्वरित पहुंच संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
छत्तीसगढ़ में कैसे काम करता है डायल-112 सिस्टम?
राज्य में किसी भी आपात स्थिति में डायल-112 पर कॉल आने के बाद कंट्रोल रूम घटना और लोकेशन की जानकारी दर्ज करता है। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में सूचना तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को भेजी जाती है, जबकि आग लगने की घटना होने पर फायर विभाग को अलर्ट किया जाता है।
अब सरकार सभी सेवाओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रही है, ताकि अलग-अलग सिस्टम के बीच सूचना और लोकेशन ट्रांसफर में लगने वाला समय बचाया जा सके और लोगों को तेजी से सहायता मिल सके।
हालांकि अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर होने और लोगों में जागरुकता की कमी के कारण भ्रम की स्थिति बनती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सभी सेवाओं को पूरी तरह एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर प्रतिक्रिया समय कम करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा सड़क दुर्घटनाओं में समय पर इलाज और आपात सहायता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले में यह ऐतिहासिक आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता न मिलना कई बार मौत का कारण बनता है। इसलिए ट्रॉमा केयर तक त्वरित पहुंच संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
2018 से संचालित है डायल-112 छत्तीसगढ़ में डायल-112 की शुरुआत 15 अगस्त 2018 को ‘’एक्के नंबर, सब्बो बर’’ थीम के साथ हुई थी। शुरुआत में यह सेवा सीमित जिलों तक थी। बाद में 18 मई को इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों में विस्तार दिया गया। इसके साथ 400 नई डायल-112 गाड़ियां और एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शुरू की गई।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
सभी इमरजेंसी नंबर 112 में एकीकृत किए जाएं।
सड़क हादसा पीड़ितों को कैश-लेस इलाज मिले।
गुड सेमेरिटन सुरक्षा तंत्र लागू किया जाए।
सभी एंबुलेंस में जीपीएस और वीएलटीडी अनिवार्य हों। पैरामेडिक्स का मानकीकृत प्रशिक्षण दिया जाए।
ट्रॉमा रजिस्ट्री और अस्पतालों की ग्रेडिंग हो।
बहुभाषी जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।
राज्यों से समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट ली जाए।



