बस्तर पुलिस विभाग में पिछले 2 वर्षों में डेढ़ से दो करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले का हुवा बड़ा खुलासा

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बस्तर पुलिस विभाग में पिछले 2 वर्षों में डेढ़ से दो करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले का हुवा बड़ा खुलासा

बस्तर पुलिस विभाग में पिछले 2 वर्षों में डेढ़ से दो करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले का हुवा बड़ा खुलासा

वेतन शाखा में पदस्थ तीन कर्मचारियों पर वेतन में हेराफेरी करने और लोन के नाम पर फर्जी भुगतान करने का लगा आरोप




बस्तर पुलिस विभाग में करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस विभाग की वेतन शाखा में पदस्थ तीन कर्मचारियों पर पिछले दो वर्षों के दौरान वेतन में हेराफेरी करने और लोन के नाम पर फर्जी भुगतान कर सरकारी राशि का गबन करने का आरोप है।  इससे जुड़े तीन आरक्षकों को कर्मचारियों के वेतन भुगतान में हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, साल 2023 से पुलिस कर्मचारियों के वेतन भुगतान में लगातार गड़बड़ी किए जाने की आशंका पर विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई थी। वित्तीय रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेजों के ऑडिट के दौरान कई संदिग्ध लेन-देन सामने आए। इसके बाद मामले की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और वास्तविक राशि का निर्धारण ऑडिट पूरा होने के बाद ही होगा।

बस्तर एसपी ने बताया कि पिछले दो सालों में विभिन्न खातों से डेढ़ दो करोड़ रुपए का आहरण किया गया है। कुछ ऐसे भी लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनको लोन देने के नाम पर सैलरी में एक्सट्रा पैसे डाल दिए और उनसे कैश में लोन वापसी के नाम पर पैसे ले लिए। ऐसे लोगों की सूची बनाकर उनसे भी पूछताछ की जा रही है। बस्तर एसपी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जांच में तथ्य सामने आया कि वेतन शाखा में पदस्थ सहायक गिरीश राय मुख्य आरोपी है। गिरीश राय वेतन आहरण के समय इस्तेमाल होने वाली सॉफ्ट कॉपी में बदलाव करता था। वह सिस्टम में छेड़छाड़ करके अपने और अपने कुछ साथियों का वेतन बढ़ाकर बैंक से पैसे निकाल लेता था। इस काम में उसके साथ विभाग के दो अन्य कर्मचारी राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू भी शामिल थे।

लोन देने का देते थे झांसा

पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि इन तीनों ने मिलकर दो साल में करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये का आहरण किया है। आरोपियों ने विभाग के 20 से अधिक पुलिस कर्मचारियों को अपना शिकार बनाया था। इनके काम करने का तरीका बेहद शातिर था, वे कुछ कर्मचारियों के वेतन में जानबूझकर अतिरिक्त पैसे डाल देते थे। बाद में उन्हें ‘लोन देने’ का झांसा देकर, उन पैसों को ‘लोन वापसी’ के नाम पर नकद वापस ले लेते थे।

कबूल किया अपराध

पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि गबन की गई इस मोटी रकम को शेयर मार्केट और क्रिप्टो करेंसी में इन्वेस्ट किया गया था। मुख्य आरोपी गिरीश राय ने पूछताछ में अपना अपराध कबूल कर लिया है। पुलिस ने इसे अमानत में खयानत का गंभीर मामला माना है।

तीनों को भेजा गया जेल

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी शलभ कुमार सिन्हा ने तीनों आरोपियों गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब अन्य कर्मचारियों के वेतन की भी जांच कर रही है, ताकि घोटाले की पूरी गहराई का पता चल सके। फिलहाल इस मामले की विवेचना जारी है।

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