सांप के काटने से 4 वर्षीय बालक की मौत, चिकित्सकों ने बताया आने में की देर, शायद बच सकती थी जान

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सांप के काटने से 4 वर्षीय बालक की मौत, चिकित्सकों ने बताया आने में की देर, शायद बच सकती थी जान

कैरेत सांप के काटने से 4 वर्षीय बालक की मौत, चिकित्सकों ने बताया आने में की देर, शायद बच सकती थी जान

फोटो प्रतीकात्मक

पत्थलगांव। पत्थलगांव थानाक्षेत्र के ग्राम दिवानपुर निवासी मृतक कार्तिक मांझी पिता मनबोध मांझी उम्र लगभग 4 वर्ष जिसे गुरुवार करीब शाम 6.30 बजे करैत जहरीले सांप ने काट लिया, उसके बाद वे झाडफ़ूंक के चक्कर में लग गये। तबीयत अधिक बिगड़ता देख उसे करीब 9.30 बजे पत्थलगांव सिविल अस्पताल लेकर आये। जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया। इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। पत्थलगांव अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया की यदि बच्चे को समय पर लेकर आते तो शायद इसकी जान बच सकती थी। परंतु इनके परिजन बच्चे को अस्पताल लाने में देर कर दिये। जिसकी वजह से उसकी मृत्यु हो गई। 

वर्षा ऋतु प्रारम्भ होने के  साथ ही नमी एवं उमस बढ़ जाती है। बारिश का पानी बिलों में जाने के कारण अपने भोजन की तलाश में सांप -बिच्छू अक्सर हमारे निवास स्थानों पर चले आते हैं और कभी -कभी लोगों को काट भी लेते हैं। इस मौसम में सर्प दंश की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। सर्प दंश में ओझा- बैगा के झाड़-फूँक में  विश्वास कर समय गंवाने से  व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।  सर्प दंश की स्थिति में सीधे नजदीकी अस्पताल पहुंचकर ईलाज कराना जरुरी है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से झाड़-फूँक जैसे अंधविश्वास से बाहर आ कर सर्पदंश की स्थिति में अस्पताल में अपना उपचार कराने की  अपील की है ।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विषैले सर्पों के काटने का इलाज अस्पतालों में उपलब्ध एंटीवेनम से ही होता है।  किसी प्रकार के झाड़-फूँक करवाने से यह ठीक नहीं हो सकता बल्कि इसमें समय गंवा देने पर अक्सर पीड़ित व्यक्ति गंभीर हो जाता है और बाद में अस्पताल लाने पर चिकित्सकों को उस मरीज पर बहुत मेहनत करनी पड़ती है । कई प्रकरणों में विष पूरे शरीर में फैल जाता है जिस कारण जान बचाना भी काफी मुश्किल रहता है। इसलिए ऐसे प्रकरणों में तत्काल अस्पताल आना ही सही है जहाँ इसका निःशुल्क इलाज किया जाता है ।

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