प्रदेश सरकार ने बदला अपना फैसला, छत्तीसगढ़ में होली पर बंद रहेंगी शराब की दुकानें, घोषित किया ड्राई डे
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी नारकोटिक्स सेल के गठन की घोषणा
छत्तीसगढ़ में होली के दिन शराब दुकानों को लेकर अब सरकार ने यू-टर्न लिया है। सरकार ने होली के दिन अब ड्राई डे घोषित कर दिया है। पहले की तरह ही होली के दिन अब शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी। पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिबंध लागू रहेंगे। अवैध परिवहन सहित अन्य हुड़दंगियों पर कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नई आबकारी नीति में होली समेत तीन ड्राई डे को खत्म कर दिया था। नई नीति के अनुसार साल 2026-27 में सिर्फ 4 दिन ड्राई डे घोषित किए गए है, इनमें 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस, 2 अक्टूबर गांधी जयंती और 18 दिसंबर गुरु घासी दास जयंती शामिल हैं। होली पर ड्राई डे नहीं था। इसे लेकर कई जगहों पर विरोध की खबरें आई थी।
छत्तीसगढ़ में 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रहने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। कांग्रेसियों ने प्रदेश के अलग-अलग शहर की शराब दुकान के सामने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और नियमों में तत्काल बदलाव की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बापू के सिद्धांतों और आदर्शों के विपरीत ऐसे पावन दिन पर शराब दुकान का खुला रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के विचारों और जनभावनाओं का अपमान बताया था।
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी नारकोटिक्स सेल के गठन की घोषणा
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली सरकार ने अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। सरकार ने सुशासन, विकास और कानून-व्यवस्था को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कई नीतिगत निर्णय इन दो वर्षों में लिए हैं। सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई नीतियां बनाई है। इसका परिणाम भी अब धरातल पर दिखने लगा है। साय सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी रोकने और बड़े आपराधिक नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी नारकोटिक्स सेल के गठन की घोषणा की है।
दरअसल, पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश में नशे का कारोबार तेजी से बढ़ा और छत्तीसगढ़ “नशे का अड्डा” बनता जा रहा था। सीमावर्ती राज्यों से मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में वृद्धि हुई थी और संगठित गिरोह सक्रिय थे। संगठित अपराध, नशे के अवैध कारोबार और अंतरराज्यीय गिरोहों पर अंकुश लगाने के लिए अब विशेषीकृत और तकनीकी रूप से सक्षम इकाइयों की जरूरत थी। प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में सरकार बनते ही शे के अवैध कारोबार पर कड़ा रुख अपनाया है, विशेष अभियान चलाए हैं और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। सरकार ने विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी नारकोटिक्स सेल के गठन किया।
नवगठित एसओजी को संगठित अपराध, बड़े आपराधिक गिरोह और संवेदनशील मामलों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वहीं एंटी नारकोटिक्स सेल राज्य में मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने, तस्करी नेटवर्क का खुलासा करने और युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग से समर्पित इकाई बनने से कार्रवाई अधिक समन्वित और परिणामकारी होगी। इससे जिला पुलिस और राज्य स्तरीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल भी सुनिश्चित होगा।
पिछले कुछ वर्षों में देशभर की तरह छत्तीसगढ़ में भी नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति और साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियां सामने आई हैं। राज्य सरकार का कहना है कि अपराध नियंत्रण के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ विशेषीकृत इकाइयों की स्थापना समय की मांग है। कुलमिलाकर साय सरकार के दो वर्ष पूरे होने के साथ कानून-व्यवस्था को लेकर यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एसओजी और एंटी नारकोटिक्स सेल का गठन यह संकेत देता है कि सरकार मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ लंबी और रणनीतिक लड़ाई की तैयारी में है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि इन नई इकाइयों का जमीनी असर कितना प्रभावी साबित होता है।



