बिना तैयारी के प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने के निर्णय से प्रदेश के सभी जिलों में शराब की सप्लाई बाधित

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बिना तैयारी के प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने के निर्णय से प्रदेश के सभी जिलों में शराब की सप्लाई बाधित

बिना तैयारी के प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने के निर्णय से प्रदेश के सभी जिलों में शराब की सप्लाई बाधित

डेड लाईन बढ़ा 1 जून 2026 से राज्य में केवल प्लास्टिक की बोतलों में ही शराब की बिक्री अनिवार्य



रायपुर। बिना तैयारी के आबकारी विभाग द्वारा प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने के निर्णय से प्रदेश के सभी जिलों में शराब की सप्लाई चेन बाधित हो गई है।

बीते 15-20 दिनों में विभाग को देसी और अंग्रेजी की चीप रेंज (किफायती श्रेणी) की शराब से करीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। किसी भी जिले में मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसके चलते अंग्रेजी की महंगी शराब और बीयर की मांग में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

दरअसल छत्तीसगढ़ में शराब की कांच की बोतलों के स्थान पर प्लास्टिक (PET) की बोतलों में शराब की बिक्री का निर्णय लिया गया है, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 (1 अप्रैल 2026) से लागू हुआ है। इस नीति के कारण, डिस्टिलर्स और बोतल निर्माता कंपनियों द्वारा विरोध किए जाने के कारण कुछ स्थानों पर शराब की आपूर्ति में धीमी गति देखी गई है। 

आपूर्ति पर असर: डिस्टिलर्स के विरोध और नई पैकिंग व्यवस्था में सामंजस्य की कमी के कारण, विशेष रूप से सस्ती शराब की आपूर्ति में अस्थायी व्यवधान की खबरें हैं।
1 जून की डेडलाइन: 31 मई तक कांच और प्लास्टिक दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे, लेकिन 1 जून 2026 से राज्य में केवल प्लास्टिक की बोतलों में ही शराब की बिक्री अनिवार्य होगी।


क्या है सरकार का तर्क?

सरकार का दावा है कि प्लास्टिक बोतल के उपयोग से लॉजिस्टिक्स आसान होंगे, साथ ही टूट-फूट की समस्या भी खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, ट्रांसपोर्टेशन की लागत में भी कमी आएगी। सरकार के अनुसार, यह फैसला राज्य की शराब आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करेगा और उत्पादों को बेहतर तरीके से वितरण किया जा सकेगा।

विरोध का कारण

वहीं, डिस्टिलर्स और बोतल निर्माता कंपनियों का कहना है कि यह फैसला बिना किसी उचित अध्ययन के लिया गया है। उनका कहना है कि प्लास्टिक बोतलों का उपयोग उनके कारोबार को प्रभावित करेगा, क्योंकि कांच की बोतल की रीसाइक्लिंग से जुड़े कई परिवारों के livelihoods प्रभावित होंगे। इसके अलावा, कई डिस्टिलर्स ने उत्पादन और सप्लाई को धीमा कर दिया है, जिससे सस्ती शराब की ब्रांड्स खासतौर पर देसी और सस्ती विदेशी शराब दुकानों में उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

प्रदेश की डिस्टिलरियों से बिलासपुर समेत प्रदेश भर की करीब 800 दुकानों में शराब की सप्लाई होती है। 1 अप्रैल से पीईटी यानी पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग का आदेश आने के बाद डिस्टिलर्स और बॉटलर्स में खलबली मच गई।

कांच की बोतलों में बॉटलिंग करने वाले कुछ पक्ष कोर्ट चले गए, वहीं अचानक बड़े पैमाने पर प्लास्टिक बोतलों की व्यवस्था करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया। इसके बाद आनन-फानन में विभाग को 31 मई तक फिर से कांच की बोतलों में बॉटलिंग का आदेश जारी करना पड़ा।

इस प्रक्रिया में डिस्टिलरियों में करीब 10 दिनों तक उत्पादन और बॉटलिंग का काम ठप रहा। इस दौरान दुकानों में मौजूद पुराना स्टॉक बिक गया। 10 अप्रैल से उत्पादन तो शुरू हुआ, लेकिन वह वर्तमान मांग की तुलना में अपर्याप्त है। दुकानों को खपत की केवल एक-तिहाई शराब मिल पा रही है, जो शुरुआती कुछ घंटों में ही खत्म हो जाती है।

चार महीने पहले कैबिनेट की मंजूरी प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने के निर्णय को चार महीने पहले ही कैबिनेट से मंजूरी मिल गई थी। हालांकि, पिछली सरकार के दौरान डिस्टिलर्स और बॉटलर्स के विरोध के बाद यह निर्णय वापस लेना पड़ा था। इसके अलावा, पीईटी प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने जैसी अफवाहें भी फैलाई गईं। विभाग ने सीधे 1 अप्रैल को आदेश जारी कर दिया।

रोज 70 करोड़ की देसी व किफायती अंग्रेजी शराब की खपत प्रदेश की 800 से ज्यादा दुकानों में रोजाना लगभग 45 करोड़ की देसी और 25 करोड़ रुपए की किफायती श्रेणी की अंग्रेजी शराब बेची जाती है। वर्तमान में सप्लाई कम होने से शासन को प्रतिदिन 40 से 50 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है। यह नुकसान ऐसे पीक टाइम पर हो रहा है जब शादियों के सीजन के कारण मांग सबसे ज्यादा रहती है।

रॉ-मटेरियल के दाम 40 से 70% तक बढ़े: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण प्लास्टिक निर्माण के कच्चे माल (रॉ-मटेरियल) की कीमतें अचानक बढ़ गई हैं। पॉलीमर की कीमतों में 40% से 60% और नैफ्था की कीमतों में महज दो हफ्तों के भीतर लगभग 70% का रिकॉर्ड उछाल आया है। पीवीसी और पॉलीथीन जैसी प्रमुख श्रेणियों के प्लास्टिक रॉ-मटेरियल में भी 30% से 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्लास्टिक बोतल उद्योगों में सेटअप तैयार नहीं: एक अधिकारी के अनुसार शराब की बॉटलिंग के लिए भारी मात्रा में प्लास्टिक बोतलों की आपूर्ति फिलहाल अन्य उद्योगों के लिए संभव नहीं है। ऐसे में डिस्टिलर्स और बॉटलर्स खुद प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रत्येक बॉटलर 7 से 8 करोड़ का सेटअप तैयार कर रहा है, जिसमें समय लग रहा है। अनुमान है कि व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त होने में समय लगेगा।


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