आरक्षक से प्रधान आरक्षक पद पर प्रमोशन के लिये अन्य जिले में तबादला आदेश की तारीख से मिलेगी वरिष्ठता, सूची में होंगे नीचे
कोर्ट ने गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, रेंज IG और संबंधित जिलों के SP को दिया निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) की पदोन्नति और वरिष्ठता सूची को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने आरक्षक से प्रधान आरक्षक पद पर प्रमोशन के लिए बनाई गई वरिष्ठता सूची और उसके आधार पर जारी फिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। और नए सिरे से नियम 16-ए के तहत सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि जो आरक्षक अपनी इच्छा से दूसरे जिले में ट्रांसफर होकर आए हैं, उन्हें प्रमोशन में उनकी मूल नियुक्ति तारीख के आधार पर वरिष्ठता नहीं दी जा सकती। ऐसे कर्मचारियों को नए जिले में तबादला आदेश की तारीख से वरिष्ठता मिलेगी और उन्हें सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।
हाईकोर्ट ने 13 फरवरी 2026 के बाद जारी की गई सभी विवादित वरिष्ठता और फिट सूचियों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस विभाग को संशोधित नियम 16-ए के तहत नए सिरे से वरिष्ठता तय करने और उसके आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
दरअसल, कोरबा, बालोद, रायपुर, सरगुजा, रायगढ़, जशपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ समेत कई जिलों में तैनात आरक्षक लव कुमार पात्रे, तारेश्वर नाथ केशरी, रवि तिवारी और सुरेंद्र कुमार देशमुख समेत कई पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं।
याचिका में बताया गया कि वे अपने-अपने जिलों में पिछले 16 से 17 साल से नौकरी कर रहे हैं। इसके बावजूद DPC-2026 के लिए बनाई गई वरिष्ठता सूची में दूसरे जिलों से अपनी इच्छा पर ट्रांसफर होकर आए पुलिसकर्मियों को उनकी पुरानी भर्ती की तारीख के आधार पर वरिष्ठ मान लिया गया और सूची में ऊपर रखा गया।
गृह जिले में पदस्थ पुलिसकर्मी पदोन्नति से वंचित
इस वजह से अपने जिले में लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे कई आरक्षक पदोन्नति की दौड़ से बाहर हो गए। पुलिसकर्मियों ने इस मामले में विभाग के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई थी। लेकिन सक्षम अधिकारियों ने 4 मई 2026 को बिना पूरी जांच किए उनकी आपत्ति खारिज कर दी।
इसके बाद परेशान पुलिसकर्मियों ने अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। राजपत्र में तय नियम 16-ए की हुई थी अनदेखी, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल आरक्षक भर्ती एवं सेवा शर्त नियम 2007 में संशोधन किया था। इसके तहत नया नियम 16-ए लागू किया गया।
इस नियम के अनुसार आरक्षक और प्रधान आरक्षक के पद जिला संवर्ग के माने जाते हैं। अगर किसी पुलिसकर्मी का तबादला प्रशासनिक कारणों से होता है, तभी उसकी पुरानी सेवा की वरिष्ठता जारी रहती है। लेकिन अगर कोई पुलिसकर्मी अपनी इच्छा या निजी कारणों से दूसरे जिले में ट्रांसफर होकर जाता है, तो उसे नए जिले की वरिष्ठता सूची में ट्रांसफर की तारीख से सबसे नीचे रखा जाएगा।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि इसके बावजूद पुलिस विभाग ने अप्रैल 2026 में तबादले का कारण जांचे बिना पुलिसकर्मियों को उनकी पुरानी नियुक्ति तारीख के आधार पर वरिष्ठता सूची में शामिल कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा-नियमों के अनुसार बनाए नई सूची
हाईकोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से बनाई गई वरिष्ठता सूची के आधार पर हुई पदोन्नति से किसी कर्मचारी को प्रमोशन का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।
कोर्ट ने गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, रेंज IG और संबंधित जिलों के SP को निर्देश दिया है कि नियम 16-ए के अनुसार नई वरिष्ठता सूची तैयार की जाए। इसके बाद ही DPC की प्रक्रिया पूरी की जाए।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस आदेश का मतलब किसी याचिकाकर्ता को सीधे प्रमोशन देना नहीं है। प्रमोशन नई वरिष्ठता सूची, पात्रता और तय नियमों के तहत योग्यता के आधार पर ही किया जाएगा।



