बिलासपुर हाई कोर्ट ने जशपुर जिले निवासी मृतक DSP लक्ष्मण चौहान के बेटे की अनुकम्पा नियुक्ति आवेदन को किया खारिज
परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से शासकीय सेवा में है, तो परिवार के दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं
बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से शासकीय सेवा में है, तो परिवार के दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल सकता।
दरअसल यह मामला जशपुर निवासी आदित्य चौहान से संबंधित है, जिनके पिता लक्ष्मण दास चौहान पुलिस विभाग में (DSP) उप पुलिस अधीक्षक थे। कोविड महामारी के दौरान 23 सितंबर 2020 को उनका निधन हो गया। आदित्य ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, जिसे सक्षम अधिकारी ने 31 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया। आदित्य ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए कोर्ट में आवेदन किया था, जिसे सक्षम अधिकारी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि दिवंगत की दूसरी पत्नी उमा तिवारी पहले से ही सिंचाई विभाग में सहायक वर्ग-3 के पद पर नौकरी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि परिवार में पहले से एक आश्रित के सरकारी सेवा में होने के कारण नियम के तहत दूसरा आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का पात्र नहीं माना जा सकता है। आदित्य ने दलील दी कि उमा तिवारी अलग रहती हैं और परिवार को आर्थिक सहायता नहीं देतीं, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने पुलिस विभाग के दिवंगत अधिकारी के बेटे आदित्य चौहान की याचिका खारिज करते हुए कहा कि नीति में स्पष्ट अयोग्यता होने पर केवल आर्थिक निर्भरता या पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर नियमों में छूट नहीं दी जा सकती।
हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग की 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला देते हुए कहा कि यदि मृत विवाहित सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य सरकारी सेवा में है, तो अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्रता नहीं होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी की मृत्यु से परिवार पर आए आर्थिक संकट में सहायता प्रदान करना है।



