प्रदेश में राजस्व प्रकरणों के निराकरण में विभागों के अधिकारियों द्वारा बरती जा रही उदासीनता, 1 लाख से अधिक प्रकरण अब तक लंबित

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प्रदेश में राजस्व प्रकरणों के निराकरण में विभागों के अधिकारियों द्वारा बरती जा रही उदासीनता, 1 लाख से अधिक प्रकरण अब तक लंबित

प्रदेश में राजस्व प्रकरणों के निराकरण में विभागों के अधिकारियों द्वारा बरती जा रही उदासीनता, 1 लाख से अधिक प्रकरण अब तक लंबित



रायपुर। प्रदेश में राजस्व प्रकरणों के निराकरण में विभागों के अधिकारियों द्वारा तहसील से लेकर जिले तक जमकर लापरवाही और उदासीनता बरती जा रही है। यही कारण है कि प्रदेश में वर्तमान में 1 लाख 40 हजार से अधिक प्रकरण अभी तक लंबित हैं। ये आंकड़े राजस्व विभाग की वेबसाइट पर दर्ज हैं। वहीं, राजस्व कोर्ट में भी लगातार प्रकरण लंबित है, क्योंकि संबंधित विभाग के अधिकारी समय पर राजस्व कोर्ट को दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। नतीजा कोर्ट को प्रकरणों के जल्दी निराकरण करने में समय लग रहा है।

वही छत्‍तीसगढ़ में राजस्व के मामले में लंबित मामले और हो रहे भ्रष्टाचार से लोग परेशान हैं। आलम यह है कि प्रदेश में अधिकतम 90 दिनों के भीतर होने वाले काम भी सालों से लंबित पड़े हैं। इसके अलावा समय पर काम नहीं होने से लोगों की जेब भी कट रही है। जमीन के सीमांकन, नामांतरण, बी-वन नक्शा-खसरा और बंटवारा जैसे काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं जिससे लोगों को महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं। 

राजस्व प्रकरण के जल्द निराकरण के लिए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को समय-समय पर निर्देश देते हैं। इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा लगातार लापरवाही बरती जाती है। यही कारण है कि शहरी से लेकर ग्रामीण लोग भी विभाग में आए दिन प्रकरण के निराकरण के लिए चक्कर लगाते रहते हैं। यही वजह है कि राजस्व अदालतों में मुकदमों का अंबार लगता जा रहा है। जिसका खामियाजा पक्षकार को भुगतना पड़ रहा है। पक्षकारों को तारीख पर तारीख दी जा रही है, इस कारण मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

विभागों में लोगों के द्वारा दस्तावेजों की फोटो कॉपी के साथ आवेदन के बाद विभाग में फाइलें तो बनाई जाती हैं, लेकिन बाद में फाइल ही विभाग में गुम हो जाती है। इसका खुलासा तब होता है, जब आवेदन दोबारा अपने प्रकरण के बारे में विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों के पास पूछने आते हैं। अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा पूछने पर कहा जाता है कि फाइल तो मिल नहीं रही है, दोबारा आवेदन कर दीजिए। अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा इस तरह के जवाब मिलने के बाद कई बार तो लोग आक्रोशित हो जाते हैं। कई बार तो अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति भी निर्मित हो जाती है।

ये प्रकरण अधिक

सीमांकन, नामांकन, बटांकन, अवैध अतिक्रमण, अनुज्ञा प्रमाण पत्र के प्रकरण सबसे अधिक विभागों में लंबित हैं।

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