छत्तीसगढ़ में पहली बार जीएसटी की वसूली के लिए कारोबारियों के खातों को कराया जा रहा फ्रीज

Breaking Posts

6/trending/recent
Type Here to Get Search Results !

छत्तीसगढ़ में पहली बार जीएसटी की वसूली के लिए कारोबारियों के खातों को कराया जा रहा फ्रीज

छत्तीसगढ़ में पहली बार जीएसटी की वसूली के लिए कारोबारियों के खातों को कराया जा रहा फ्रीज

स्टेट जीएसटी को राज्यभर के व्यापारियों से 2300 करोड़ से ज्यादा करना है टैक्स वसूल



छत्तीसगढ़ में पहली बार जीएसटी की वसूली के लिए कारोबारियों के खातों को फ्रीज किया जा रहा है। स्टेट जीएसटी को राज्यभर के व्यापारियों से 2300 करोड़ से ज्यादा टैक्स वसूल करना है। इसके लिए विभाग की ओर से लगातार पिछले पांच साल से नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

लेकिन कारोबारी पुराने टैक्स को अदा ही नहीं कर रहे हैं। दरअसल, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि जो टैक्स सरकार को मिलना है, उसकी वसूली में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है। कारोबारियों को यह टैक्स देना ही है।

कैग की नाराजगी के बाद ही विभाग के अफसर हरकत में आए। सबसे पहले पिछले पांच साल के बकायादारों की सूची तैयार की गई। इनकी संख्या 25 हजार से भी ज्यादा है। इनमें कई ऐसे हैं जिन पर 5 से 10 करोड़ तक का टैक्स बकाया है। ऐसे व्यापारी पिछला टैक्स का भुगतान नहीं कर रहे हैं और कारोबार भी कर रहे हैं।

विभाग के अफसरों को ऐसे कारोबारियों का दफ्तर सील करने का भी अधिकार है, पर इससे कारोबार पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए विभाग के अफसरों ने ऐसे सभी कारोबारियों के बैंक खातों को सीज करने का काम शुरू कर दिया है। अभी 40 से ज्यादा बैंकों की सूची बनाई गई है।

इन बैंक वालों को बल्क में बकाया टैक्स का नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस के साथ ही कहा जा रहा है​ कि कारोबारी या फर्म जब तक बकाया टैक्स न चुका दें, तब तब उनके बैंक खाते को होल्ड रखा जाए।

अचानक पता चलने से हड़बड़ा रहे हैं व्यापारी बैंकों से वित्तीय लेन-देन रुकने पर व्यापारी हड़बड़ा जा रहे हैं। जब वे बैंकों से संपर्क कर रहे हैं, तो उन्हें बताया जा रहा है कि आपका टैक्स बकाया है। पहले टैक्स क्लियर कीजिए। इसके बाद ही आपके खाते से लेन-देन हो सकेगा। अफसरों का दावा है कि खातों को फ्रिज करने के बाद से ही बकाया टैक्स की रिकवरी में तेजी आ गई है। जिन व्यापारियों पर बकाया कम है वे तुरंत उसका भुगतान कर रहे हैं। जिनका ज्यादा है वे पहली किस्त देने के बाद बाकी जल्द चुकाने का शपथ पत्र भी दे रहे हैं।

प्रदेश में कुल 1.9 लाख पंजीकृत व्यापारी हैं। इसमें से 1.2 लाख स्टेट और 70 हजार सेंट्रल जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ को जीएसटी एवं वैट से 23,448 करोड़ रुपए मिले थे, जो राज्य के कुल कर राजस्व का 38% था। छत्तीसगढ़ ने 18% की जीएसटी वृद्धि दर हासिल की है जो देश में सबसे ज्यादा थी। यही वजह है कि इस वित्तीय साल 2025-26 में भी कलेक्टर की दर पिछले साल से बढ़ाना है। अफसरों का फोकस वर्तमान टैक्स के साथ ही पुराना टैक्स वसूल करने में भी है।

10% रकम देकर खाता खुलवा सकते हैं स्टेट जीएसटी की ओर से अभी बकाया टैक्स की वसूली के लिए लगातार व्यापारियों के बैंक खाते होल्ड किए जा रहे हैं। जीएसटी के नियमों में इसका प्रावधान है। इस परेशानी से बचने के लिए कुल बकाया टैक्स का 10% चुकाकर फ्रीज खाते को चालू कराया जा सकता है।

इस प्रक्रिया के बाद कुल बकाया टैक्स का 20% रकम देकर ट्रिब्यूनल में बकाया टैक्स के खिलाफ अपील भी की जा सकती है। अभी अफसरों को चाहिए वे बिना नोटिस के किसी भी व्यापारी का खाता फ्रीज न करें। कई बार इस तरह की भी शिकायत आती है​ कारोबारी को नोटिस ही नहीं मिला और खाता होल्ड कर दिया गया है।

जीएसटी अधिकारी ने बताया कि टैक्स जमा न करने वालों पर कर रहे सख्ती उन्हीं कारोबारियों के खाते फ्रीज हो रहे हैं जिन्होंने बकाया टैक्स नहीं दिया है। बार-बार नोटिस के बाद भी वे टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं। इस वजह से सख्ती की जा रही है। जो टाइम पर टैक्स का भुगतान कर रहे हैं उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो रही है। 

इन कारोबारियों पर सबसे ज्यादा बकाया

विभाग के अनुसार अभी सबसे ज्यादा बकाया लोहा, कोयला, स्टील और सीमेंट कारोबारियों पर है। बकाया टैक्स का करीब 45 फीसदी रकम इन्हीं व्यापारियों पर है। इन व्यापारियों ने पिछले तीन से पांच साल तक टैक्स जमा नहीं किया है। इसमें ऐसे कारोबारी भी शामिल हैं जिन पर 5 से 20 करोड़ तक का भी बकाया है। इनके अलावा बाकी कारोबारी अलग-अलग व्यापार से संबंधित हैं

Top Post Ad


 

Below Post Ad

Ads Bottom