छत्तीसगढ़ में अब पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री नाम ट्रांसफर पर देना होगा 1 प्रतिशत टैक्स
दिल्ली से लग्जरी गाड़ी लाकर बेचने वालों के कारोबार को झटका
वहीं पंजीकृत ऑटो मोबाइल डीलरों को अब पुरानी कार को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत में बेचने पर देना होगा 18 फीसदी जीएसटी
छत्तीसगढ़ में पुरानी गाड़ियों को बेचना अब गाड़ी मालिकों के लिए पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने नया कानून लागू कर दिया है, जिसके तहत किसी भी वाहन के नामांतरण के समय टैक्स देना अनिवार्य होगा। छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम 2025 को विधानसभा से पारित करने के बाद अब राज्यपाल ने भी मंजूरी दे दी है।
वहीं छत्तीसगढ़ में ऑटो मोबाइल डीलरों को अब पुरानी कार को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत में बेचने पर 18 फीसदी जीएसटी अनिवार्य रूप से देना पडे़गा। इसके लिए कार के मूल्य का निर्धारण घिसावट (डेप्रिसिएशन) का मूल्यांकन करने के बाद निर्धारित होगा। इससे अधिक कीमत पर बेचने पर अतिरिक्त कीमत के आधार पर जीएसटी की कटौती होगी।
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट चेतन तरवानी ने बताया कि कार बेचने वाला एक व्यक्ति या पंजीकृत कार डीलर नहीं होने पर जीएसटी नियम लागू नहीं होगा। खरीदार के जीएसटी में पंजीकृत नहीं होने पर भी टैक्स देयता नहीं बनेगी लेकिन, कार बेचने वाला जीएसटी में पंजीकृत होने पर प्रोप्राइटरशिप, पार्टनरशिप फर्म या कंपनी होने पर जीएसटी देना पड़ेगा।
उदाहरणतः- पंजीकृत डीलर द्वारा किसी कार को 10 लाख रुपए में खरीदा गया और डेप्रिसिएशन के बाद उसकी बुक वैल्यू दूसरे साल 7.65 लाख रुपए रह गई है। इसे 8 लाख रुपए में बेचने पर 35000 रुपए का लाभ मिलने पर 18 फीसदी जीएसटी देना पडे़गा। वहीं कार को 7.50 लाख में बेचने पर इसकी बुक वैल्यू से कम होने पर जीएसटी दर लागू नहीं होगी।
बता दें कि कार खरीदते समय जीएसटी इनपुट क्रेडिट उपलब्ध नहीं होता। बिक्री के समय सही तरीके से जीएसटी ट्रांजैक्शन करना जरूरी है। वहीं, कार बुक वैल्यू से अधिक में बेचने पर इसे वार्षिक रिटर्न में दर्ज करना अनिवार्य होगा। जीएसटी को लेकर कारोबारियों और जीएसटी रजिस्टर्ड संस्थानों को सलाह दी है कि पुरानी कार की बिक्री करते समय नियमों को ध्यानपूर्वक पालन करें। ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कर संबंधी परेशानी से बचा जा सकें।
छत्तीसगढ़ में अब पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री नाम ट्रांसफर पर देना होगा 1 प्रतिशत टैक्स
छत्तीसगढ़ में अब पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री पर 1 प्रतिशत टैक्स देना होगा। गाड़ी चाहे बाइक हो या कार। ट्रकों और सभी तरह के माल वाहकों के लिए भी ये नियम लागू कर दिया गया है। नए नियम के मुताबिक, जब भी कोई गाड़ी दूसरी बार बेची जाएगी, तो गैर-परिवहन वाहनों के लिए वाहन के मानक मूल्य का 1% और परिवहन वाहनों जैसे मालवाहक ट्रकों के लिए 0.5% शुल्क लगेगा। टैक्स के बिना वाहन मालिक का नाम ट्रांसफर ही नहीं होगा। इस नए सिस्टम के लागू होने से वाहन 10 लाख का होने पर 10 हजार और 20 लाख का होने पर 1 फीसदी की दर से 20 हजार टैक्स देना पड़ेगा। यह प्रक्रिया हर बार बिक्री पर लागू होगी।
परिवहन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में 1 प्रतिशत टैक्स को अपडेट कर दिया गया है। चूंकि आरटीओ में वाहनों का पूरा रिकार्ड ऑनलाइन ही मैनेज किया जा रहा है। ऐसे में टैक्स अदा किए बिना नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ेगी। राज्य के सभी आरटीओ कार्यालय में 1 फीसदी टैक्स की वसूली शुरू कर दी गई है। वाहन पुराना होने पर भी टैक्स में किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।
यानी अगर वाहन 10 साल पुराना भी है तो उसकी कीमत के आधार पर टैक्स में किसी तरह की कमी नहीं की जाएगी। 1 फीसदी टैक्स की वसूली वाहन के शोरूम की कीमत से होगी। यानी गाड़ी की शोरूम में खरीदते समय जितनी कीमत थी, उसी कीमत पर टैक्स लिया जाएगा। इस नियम में ये भी स्पष्ट कर दिया गया है कि एक वाहन चाहे कितनी बार भी बिके, हर बार नाम ट्रांसफर करने के पहले एक फीसदी टैक्स वसूला जाएगा।
दिल्ली से लग्जरी गाड़ी लाकर बेचने वालों के कारोबार को झटका
1 फीसदी टैक्स लागू किए जाने के नए नियम से दिल्ली से वाहन लाकर बेचने वालों के कारोबार पर तगड़ा झटका लगेगा। दिल्ली में 15 साल पुराने वाहनों का परिचालन अवैध है। यानी वहां 15 साल के बाद कोई भी वाहन नहीं चलाए जा सकते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में री रजिस्ट्रेशन के बाद उन वाहनों को चलाया जा सकता है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली के लग्जरी वाहनों की खरीदी-बिक्री यहां बढ़ गई है।
50-60 लाख से एक-एक करोड़ तक की लग्जरी गाड़ियां वहां से कम कीमत पर खरीदकर एजेंट रायपुर में अच्छी कीमतों पर बेच रहे हैं। यहां चूंकि री रजिस्ट्रेशन के अलावा सीजी सीरीज का नंबर भी आसानी से मिल जाता है। इसलिए लोग दिल्ली के लग्जरी वाहन खरीद लेते हैं। अब दिल्ली से लाई जाने वाली गाड़ी जितनी महंगी होगी, 1 फीसदी टैक्स के हिसाब से उतना ज्यादा टैक्स लगेगा। इस वजह से वहां से लाकर गाड़ियों की खरीदी-बिक्री के कारोबार पर असर पड़ेगा।
पड़ताल में पता चला है कि राज्य में हर साल औसतन 1 लाख 50 हजार से ज्यादा पुराने वाहनों की खरीदी बिक्री होती है। इनमें 55 प्रतिशत दुपहिया वाहन होते हैं। 25 प्रतिशत कार और इसी तरह के वाहन बिकते हैं। 20 फीसदी ही बड़े और माल वाहकों की खरीदी बिक्री होती है। स्पष्ट है कि बाइक-मोपेड और कारों की खरीदी बिक्री ज्यादा होती है। एक फीसदी टैक्स लगने से बाइक खरीदने वालों पर भी टैक्स का भार पड़ेगा।
कंस्ट्रक्शन वाहनों पर भी नई व्यवस्था
इस कानून में निर्माण कार्य से जुड़े वाहनों के लिए भी प्रावधान किया गया है। अब लोडर, डंपर, मोबाइल क्रेन, जेसीबी और बैकहो लोडर जैसी मशीनों पर अब मासिक या त्रैमासिक टैक्स की जगह लाइफटाइम टैक्स लागू कर दिया है। पंजीयन के समय ही लाइफटाइम टैक्स देना होगा। यदि इनके मालिकाना हक में बदलाव होगा, तो फिर से पंजीयन मूल्य का आधा प्रतिशत टैक्स भरना होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार ने यह फैसला लगातार बढ़ रही गाड़ियों की संख्या और उनके ट्रांसफर में हो रहे अनियमितताओं को रोकने के लिए लिया है। पहले पुरानी गाड़ियां बार-बार बेची जाती थीं और टैक्स से बचने की कोशिश होती थी। लेकिन अब हर बिक्री पर राजस्व सुनिश्चित होगा।
वाहन मालिक संगठनों का कहना है कि यह कानून वाहन खरीददारों और विक्रेताओं दोनों के लिए महंगा सौदा साबित होगा। खासकर मध्यम वर्गीय परिवार, जो सेकंड हैंड कार या बाइक खरीदते हैं, उन्हें अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। हालांकि सरकार का तर्क है कि इससे कर चोरी पर रोक लगेगी और परिवहन विभाग की आय में पारदर्शिता आएगी।
सरकार को मिलेगा हर ट्रांजेक्शन पर लाभ
नई व्यवस्था के तहत, कोई भी वाहन जितनी बार भी खरीदा या बेचा जाएगा, हर बार सरकार को निर्धारित प्रतिशत के हिसाब से टैक्स मिलेगा। इससे: राज्य की आय में नियमित बढ़ोतरी होगी, टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी, हर वाहन की बिक्री से राजस्व अर्जन सुनिश्चित होगा।




