रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत बिलासपुर व झारखंड से 11 ठगों को किया गिरफ्तार
अधिक फॉलोवर की प्रोफाइल पर महिलाओं की तस्वीरें लगाकर फर्जी मोबाइल नंबर करते थे शेयर
लड़कों को ठग लड़की बनकर फंसाते हैं, तो लड़कियों को लड़का बनकर दिया जाता है शादी का झांसा
सोशल मीडिया पर अपनी फोटो या निजी जानकारी साझा करने से बचें, किसी की मांग पर पैसे न भेजें, आईडी को रखें सुरक्षित
रायपुर। रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत 11 ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर सक्रिय एक ऐसे संगठित गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो महिलाओं की फर्जी प्रोफाइल बनाकर मैट्रिमोनियल फ्रॉड के नाम पर देश भर के लोगों से ठगी कर रहा था। इस गैंग के सदस्य जमशेदपुर (झारखंड) और बिलासपुर के सरकंडा में फर्जी काल सेंटर चला रहे थे। आरोपियों द्वारा 50 लाख से अधिक फॉलोवर की प्रोफाइल पर महिलाओं की तस्वीरें लगाकर फर्जी मोबाइल नंबर शेयर किए जाते थे। इन प्रोफाइल पर महिलाओं की असली तस्वीरें लगाकर फर्जी मोबाइल नंबर शेयर किए जाते थे। जो भी लोग विवाह या संपर्क के लिए काल करते, उन्हें वधू का बॉयोडाटा, पता या फोटो दिखाने के नाम पर पैसे मांगे जाते और ठगी की जाती थी। पुलिस ने इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 36 मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की गई है।
सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म (फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स, यू-ट्यूब) अब ठगी का बड़ा माध्यम बन गए हैं। इन पर फर्जी अकाउंट बनाकर लड़के और लड़कियों दोनों से ठगी की जा रही है। लड़कों को ठग लड़की बनकर फंसाते हैं, तो लड़कियों को लड़का बनकर शादी का झांसा दिया जाता है।
इस तरह की ठगी लगातार बढ़ रही है। इनमें आम तौर पर पांच से दस हजार रुपए तक की ठगी होती है। इसलिए लोग शिकायत नहीं करते। साइबर एक्सपर्ट की मानें तो सोशल मीडिया में लगभग हर व्यक्ति को रोज किसी न किसी फर्जी आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिल रही है।
ज्यादातर रिक्वेस्ट सुंदर और ग्लैमरस प्रोफाइल से आती हैं। जो लोग इन्हें स्वीकार कर लेते हैं, उनसे पहले सामान्य बातचीत की जाती है, फिर अश्लील बातें होती हैं। देर रात वीडियो कॉल कर रिकॉर्डिंग की जाती है और सोशल मीडिया में पोस्ट करने की धमकी देकर पैसे वसूले जाते हैं। देशभर में रोजाना ऐसे गिरोह एक हजार से ज्यादा फर्जी आईडी बना रहे हैं।
पूर्व में गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी और मोबाइल डाटा विश्लेषण के आधार पर टीम ने जमशेदपुर (झारखंड) और बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में दबिश दी। कार्रवाई में जमशेदपुर से तीन और बिलासपुर से आठ कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में राजफाश हुआ कि यह नेटवर्क पिछले दो वर्षों से सक्रिय था और विभिन्न राज्यों के हजारों लोगों से ठगी कर चुका है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर 262 फर्जी आईडी बनाकर सक्रिय थे। इन आईडी के कुल 50 लाख से अधिक फॉलोवर हैं।
सोशल मीडिया अकाउंट लॉक रखें मैट्रिमोनियल साइट के नाम पर ठगी कोई नई बात नहीं है। ठग सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। इन साइट्स पर प्रोफाइल वेरिफिकेशन की कोई विश्वसनीय प्रक्रिया नहीं होती। इससे असली और फर्जी प्रोफाइल में फर्क करना मुश्किल होता है। ऐसे में चैट या मुलाकात के दौरान अपनी गोपनीयता का ध्यान रखें।
सोशल मीडिया पर अपनी फोटो या निजी जानकारी साझा न करें। किसी की मांग पर पैसे न भेजें। किसी लिंक या फाइल को डाउनलोड करने से बचें। अपनी आईडी को सुरक्षित रखें। अनजान आईडी से आई फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। क्योंकि ऐसा करने पर वह आपकी प्रोफाइल और संपर्कों पर नजर रख सकता है। सोशल मीडिया में कई फर्जी बायोडाटा अपलोड किए गए हैं, जिनके जरिए लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं।
आरोपियों से 36 स्मार्टफोन जब्त किए गए हैं। जांच में इन फर्जी आईडी के 50 लाख से ज्यादा फॉलोअर मिले हैं। पुलिस ने बताया कि ठगी के लिए उपयोग किए जा रहे म्यूल अकाउंट पर केस दर्ज किया जा रहा है। इसी के तहत डीडी नगर थाने में भी एचडीएफसी बैंक के 79 खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया।
इन खातों की जांच से सुराग मिला, जिसके बाद छापेमारी की गई। फर्जी मैट्रिमोनियल साइट चलाने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ के 7 और झारखंड से 4 आरोपी पकड़े गए पुलिस ने छापा मारकर शुभम दास (26), लक्ष्मण गोप (29), असित पातर (24) जमशेदपुर झारखंड और सूरज पटेल (21), सुखसागर कैवर्त (22), मानसू डाहिरे (21), करण पुष्पकार (22), सिराज खान (20) सरकंडा बिलासपुर, अनिकेत कुलदीप (20) रायगढ़ से, रमाकांत गंधर्व (22) कबीरधाम से और त्रियंबक भास्कर उर्फ बाबू (27) कोरिया को गिरफ्तार किया है।



