गिरदावरी रिपोर्ट में कई प्रकार की त्रुटि आने लगी सामने, ऑनलाइन में धान की जगह लिखा निरंक

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गिरदावरी रिपोर्ट में कई प्रकार की त्रुटि आने लगी सामने, ऑनलाइन में धान की जगह लिखा निरंक

गिरदावरी रिपोर्ट में कई प्रकार की त्रुटि आने लगी सामने, ऑनलाइन में धान की जगह लिखा निरंक

किसान पटवारी पर लगा रहे लेनदेन का आरोप, लापरवाही और सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी का खामियाजा किसानों को पड़ रहा भुगतना




पत्थलगांव ब्लॉक के गिरदावरी रिपोर्ट में कई प्रकार की त्रुटि सामने आने लगी हैं। जिससे किसान परेशान हैं। कई किसान जो धान की फसल लिए हैं उनके रिकार्ड के रकबे में कुछ भी नहीं (निरंक) दर्शाया गया है। जिसकी चिंता किसानों को सताने लगी है। ऐसे में अगर त्रुटि सुधार नहीं हुआ तो किसान धान बेचने से वंचित रह जाएंगे और शासन के द्वारा मिलने वाला लाभ भी नहीं मिल पाएगा। परेशान किसानों ने पटवारी और अनुविभागीय अधिकारी को आवेदन देकर सुधार करने की गुहार लगाई है। 

सरकार चाहे किसानों के हित में कितनी भी बड़ी बड़ी बातें या वादें कर लें पर जमीनी हकीकत कुछ अलग ही बयां करते नजर आती है। डिजिटलीकरण ऑनलाइन करने के साथ साथ लोगों को अन्य प्रकार की समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। किलकिला क्षेत्र के ग्राम नारायणपुर के किसान रुद्रोराम यादव पिता युधिष्ठिर यादव जाति महकूल, हेमो बाई पति रुद्रों राम, त्रिलोचन यादव पिता रुद्रों राम, टिकेश्वर यादव पिता स्व जगेश्वर, टंकधर पिता गिरधारी सभी ने अपने खेतों में हुई त्रुटि को सुधारने हेतु पटवारी व अनुविभागीय अधिकारी को आवेदन देकर सुधार करने की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि हमारे साथ साथ अन्य किसानों के साथ भी यही समस्याएं है। 

कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि आवेदन देकर सुधार करने यहां के पटवारी इफ़्रेंम केरकेट्टा के पास जाने पर उन्हें बिना कुछ लेनदेन के कुछ भी सुधार करने हेतु मना किया जा रहा है। अब किसानों के चेहरे पर मायूसी और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश साफ साफ नजर आ रही है। 

बता दें कि जिले में धान खरीदी को लेकर पंजीकृत किसानों के रकबे और गिरदावरी रिपोर्ट बनाई गई थी, लेकिन इस रिपोर्ट में अब खामी मिल रही है। राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों के पंजीकृत धान के रकबे और गिरदावरी में त्रुटि होने पर तत्काल सुधार के दिए गए निर्देश दिए हैं। इस संबंध में प्राथमिकता के आधार पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

समर्थन मूल्य में धान खरीदी के पूर्व हुए गिरदावरी में त्रुटि के चलते किसान सुधार के लिए कार्यालयों का चक्कर लगाने के लिए मजबूर हो रहे है। गिरदावरी के दौरान राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों की लापरवाही और सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि कई लोगों के द्वारा धान का फसल उगाया गया था, जबकि गिरदावरी में धान का रकबा शून्य अंकित कर दिया गया है। यह त्रुटि देखकर किसान परेशान हैं।किसानों का रिकॉर्ड अब तक अपग्रेड नहीं हो पाया है। इससे आगामी धान खरीदी सीजन में इन किसानों के धान बेचने पर संकट गहराने की आशंका है। वहीं, संबंधित विभाग का दावा है कि समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि किसी भी किसान को धान विक्रय से वंचित न होना पड़े।

वही इस मामले में पटवारियों का कहना है कि हमारे द्वारा पोर्टल से कुछ भी सुधार करने का ऑप्शन नही आता, जिसके वजह से हम इस त्रुटि का सुधार नही कर पाते है। ये सभी सुधार ऊपर से ही होने के कारण हम सब मजबूर है। ओर किसान परेशान हो रहे है 

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