छत्तीसगढ़ प्रदेश अफीम की खेती की वजह से बना चर्चा का विषय, एक के बाद एक केस आ रहे सामने
दुर्ग के बाद बलरामपुर में अफीम की खेती का मामला आया सामने
भूपेश बघेल ने कहा भाजपा इस नशे के कारोबार में लिप्त, दूसरा मामला आने के बाद गृहमंत्री शर्मा बोले-
छत्तीसगढ़ प्रदेश इस समय अफीम की खेती की वजह से चर्चा में बना हुआ है, जहां रोज नए-नए केस सामने आ रहे हैं। अब दुर्ग के बाद बलरामपुर में अफीम की खेती का मामला सामने आया है। मंगलवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 एकड़ के खेत में अफीम की फसल को बरामद किया गया है। कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी के सरनाटोली गांव से दूर जंगल किनारे अफीम की खेती की गई थी।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, झारखंड के व्यक्ति द्वारा 2 ग्रामीणों की करीब 4 एकड़ जमीन लीज पर लेकर अफीम की खेती की गई है। पुलिस और प्रशासन की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस खेत को किसने लीज में लिया था। मौके से पुलिस टीम ने बड़ी मात्रा में सूखे डोडे बरामद किया है, जिसमें खसखस भरे हुए हैं।
वही आज बुधवार को रायपुर से एनसीबी और फॉरेंसिक की टीम त्रिपुरी पहुंचकर जांच करेगी। पुलिस ने खेतों की काम करने वाले झारखंड के 5 लोगों को हिरासत में लिया है। अफीम की खेती करने वाले सरगना की तलाश की जा रही है।
बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत त्रिपुरी के सरनाटोली निवासी रूपदेव राम पिता ठाकुर राम व कौशिल पिता रुंगु की करीब 4 एकड़ जमीन को झारखंड के एक व्यक्ति ने लीज पर ली है। उक्त दोनों ही जमीन चारों ओर जंगल से घिरी हुई है। बताया जा रहा है कि फूलों की खेती करने के नाम पर दोनों जमीन मालिकों को बरगलाया गया था। बाद में करीब 4 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती की गई। जब ग्रामीणों को यह भनक लगी कि यह अफीम की खेती है तो पुलिस तक मामला पहुंचा।
ग्राम सरनाटोली में चारों ओर से घिरे जंगल के बीच खेत में अफीम की खेती देख अफसरों के भी होश उड़ गए। इसके बाद पुलिस व प्रशासन की टीम ने खेत को चारों ओर से घेरकर अफीम के पौधे जब्त करने की कार्रवाई शुरु कर दी है। अफसरों का कहना है कि खेती के लिए ऐसी जगह का चुनाव किया गया है, जहां से आसानी से किसी का आना-जाना न हो।
अफीम पूरी तरह से तैयार थी और डोडों में चीरा भी लगाया गया था। ग्रामीणों से मिली सूचना पर कुसमी एसडीओपी सहित प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची है। जहां अफीम जब्त कर आगे की कार्रवाई की जा रही है, खेत किसका है, किसने अफीम की खेती की है इसकी जांच जारी है।
सितंबर-अक्टूबर में लगाए गए पौधे ग्रामीणों से बातचीत और प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अफीम की खेती सितंबर-अक्टूबर के दौरान शुरू की गई थी। खेत में लगे अधिकांश पौधों के फूलों में पहले से ही चीरा लगा हुआ मिला, जिससे संकेत मिला कि अफीम निकालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। फसल पकने लगी तो मजदूरों को हटा दिया खेत की सिंचाई वन विभाग के डेम के पानी से की जा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार शुरुआती दिनों में गांव के कुछ लोग यहां मजदूरी करते थे, लेकिन जब फसल तैयार होने लगी, तो ग्रामीणों को हटाकर झारखंड से मजदूरों से काम कराया जाने लगा।
फसल से निकला काफी माल पहले ही बेच दिया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर खेती से लेकर अफीम की निकासी और बिक्री तक का पूरा काम हो गया, लेकिन स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
पंचायत के सरपंच फेकूंदर नाग ने बताया कि, जनवरी में ग्रामीणों ने फसल की कुछ फोटो भेजी थी। जिसे उन्होंने कुसमी पुलिस के मुंशी को भेजा था। फोन भी किया था। पुलिस वालों ने कहा कि, ठीक है दिखवाते हैं। इसके बाद भी पुलिस अफीम के खेतों तक नहीं पहुंची।
भूपेश बघेल ने कहा भाजपा इस नशे के कारोबार में लिप्त
बलरामपुर में अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा- मैंने पहले ही कहा था कि दुर्ग तो महज पर्दाफ़ाश की शुरुआत थी। अफीम सहित सूखे नशे का कारोबार सुनियोजित तरीके से मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के संरक्षण में चल रहा है। दुर्ग में जो भाजपा नेता अफीम की खेती करते पकड़ा गया, उसे विष्णुदेव सरकार ने मुख्य आरोपी तक नहीं बनाया। यह खेल बड़ा है। पूरी भाजपा इस नशे के कारोबार में लिप्त है।
दूसरा मामला आने के बाद गृहमंत्री शर्मा बोले-
पूरे प्रदेश में कराएंगे जांच प्रदेश में अफीम की खेती का दूसरा मामला आने के बाद विधानसभा में विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कहां-कहां इसकी खेती हो रही है, इसकी जांच कराएंगे। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।




