धान का कटोरा कहलाने वाले प्रदेश में आखिर कौन कर रहा अफीम की खेती
दुर्ग के बाद अब बलरामपुर जिले के 2 जगहों में अफीम के खेत मिलने से मामला गरमाया
धान का कटोरा कहलाने वाले प्रदेश में आखिर कौन अफीम की खेती कर रहा है? दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में अफीम के खेत मिलने से मामला गरमा गया है। एक तरफ पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की जांच चल रही है, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष इन अफीम के खेतों को लेकर सीधे-सीधे पुलिस, इंटेलिजेंस और सरकार की नाकामी बता रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि किसी भी मामले को न तो छिपाया जा रहा है और न ही दबाया जा रहा है, बल्कि कार्रवाई की जा रही है। अब सरकार ने हर जिले में इस मामले की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि विपक्ष के आरोपों में दम है या सरकार के दावों में?
दुर्ग मामले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जानकारी मिली है कि आरोपी बीजेपी नेता ने यूट्यूब पर अफीम की खेती सीखकर यह काम शुरू किया था, जबकि एक अन्य आरोपी विकास विश्नोई का पहले राजस्थान में अफीम बेचने का रिकॉर्ड भी सामने आया है।कुल मिलाकर सवाल यह है कि क्या सचमुच धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ पर अब अफीम नेक्सस की नजर पड़ चुकी है? आखिर कब से चल रहा था यह खेल और प्रदेश में कहां-कहां इसके बाकी खेत छिपे हुए हैं?
दरअसल, बलरामपुर जिले में सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस और राजस्व अमले ने खजूरी पंचायत के तुर्रीपानी गांव में छापा मारा, जहां उन्हें लगभग ढाई से तीन एकड़ में अफीम की फसल लहलहाती हुई मिली। अधिकारियों के अनुसार अफीम के पौधे पूरी तरह से पके हुए थे और उनमें चीरा लगा हुआ था, जिससे पता चलता है कि तस्कर अफीम का लेटेक्स (दूध) निकालने के आखिरी स्टेज में थे।
शुरुआती जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि यह ज़मीन एक लोकल आदिवासी किसान की थी और इसे झारखंड के किसी व्यक्ति को खेती के लिए लीज़ पर दिया गया था। पुलिस अब इस सिंडिकेट के पीछे के खास लोगों की तलाश कर रही है। इस घटना से छत्तीसगढ़ में राजनीतिक हंगामा मच गया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने सोशल मीडिया पर सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरे साल बोई जाने वाली फसलों का रिकॉर्ड प्रशासन के पास रहता है, तो फिर उसकी नाक के नीचे इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती कैसे हो रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि कहीं न कहीं मिलीभगत की आशंका भी पैदा करता है। सिंहदेव ने यह भी पूछा कि प्रदेश की सरकार इस गंभीर मुद्दे पर चुप क्यों है और आखिर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
बताया जा रहा है कि चंदाडांडी गांव झारखंड की सीमा से लगा हुआ है, जिसके कारण सीमा पार से जुड़े नेटवर्क की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस आसपास के इलाकों में भी जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और अवैध खेती करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि दो-तीन दिन पहले ही बलरामपुर जिले के ही कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में अफीम की खेती मामले का खुलासा हुआ था। यहां झारखंड का एक व्यक्ति जमीन को लीज पर लेकर अफीम की खेती कर रहा था। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर फसल को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।



