सेकेंड हैंड वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए सरकार ने धोखाधड़ी रोकने और पारदर्शिता लाने हेतु किये नए नियम लागू
वाहन श्रेणी के अनुसार 1 लाख से 5 लाख रुपए तक की बैंक गारंटी जमा कराना अनिवार्य
सेकेंड हैंड वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए सरकार ने धोखाधड़ी रोकने और पारदर्शिता लाने हेतु नए नियम लागू किए हैं। अब आरसी (RC) ट्रांसफर के लिए क्रेता-विक्रेता दोनों की उपस्थिति अनिवार्य है, और पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री अब पारदर्शी डीलर्स के लिए गारंटी और टैक्स के नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इसके तहत वाहन श्रेणी के अनुसार 1 लाख से 5 लाख रुपए तक की बैंक गारंटी जमा कराना अनिवार्य होगा।
साथ ही हर वाहन का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखना पड़ेगा। नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकेगा और बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकेगी। राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम, 1994’ में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है।
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार अधिकृत डीलर्स को ट्रेड सर्टिफिकेट की वैधता अवधि तक निर्धारित बैंक गारंटी सरकार के पास जमा रखनी होगी। रिकॉर्ड में गड़बड़ी, नियमों के उल्लंघन या लापरवाही की शिकायत मिलने पर पंजीयन प्राधिकारी पहले डीलर को सुनवाई का अवसर देगा। दोष सिद्ध होने पर लाइसेंस निलंबित या स्थायी रूप से निरस्त किया जा सकेगा।
फाइनेंस वाली गाड़ियों के सौदे पर भी निगरानी यदि वाहन किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास हाइपोथिकेटेड अथवा मॉर्गेज है, तो उसकी खरीद-बिक्री से पहले संबंधित फाइनेंसर की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना सहमति ऐसे वाहन का सौदा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा डीलर्स को पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था और परिसर में अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
वाहन खरीदते ही करनी होगी ऑनलाइन एंट्री नए नियमों के तहत कोई भी डीलर बिना रिकॉर्ड के वाहन अपने पास नहीं रख सकेगा। वाहन प्राप्त होते ही उसी दिन सरकारी पोर्टल पर उसकी ऑनलाइन प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा। वाहन मालिक से वाहन लेने और वापस करने, दोनों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी, जिसकी डिजिटल पावती तत्काल जारी होगी।
डीलर्स को अपने स्टॉक में मौजूद सभी वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट रखना होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन के दस्तावेज वैध हों, टैक्स एवं अन्य देनदारियां जमा हों और किसी प्रकार का कानूनी विवाद लंबित न हो।
ग्राहकों को क्या फायदा होगा
सेकेंड हैंड वाहन कारोबार में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा। {दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी। {वाहन खरीदते ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। {अपराध या गलत इस्तेमाल की स्थिति में वाहन की ट्रैकिंग आसान होगी। {फाइनेंस वाली गाड़ियों की खरीद-बिक्री अधिक पारदर्शी बनेगी। {वाहन की स्थिति और सुरक्षा मानकों पर बेहतर निगरानी रहेगी।
जीएसटी (GST) के नियम
यदि आप किसी रजिस्टर्ड डीलर से सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदते हैं, तो वाहन पर 18% जीएसटी लगाया जाता है। यह 18% जीएसटी पूरी कीमत पर न लगकर केवल डीलर के मुनाफे (मार्जिन) पर ही लागू होता है (उदाहरण: यदि डीलर ने 8 लाख में खरीदी और 9 लाख में बेची, तो 1 लाख के मुनाफे पर ही टैक्स लगेगा) ।



