भूतपूर्व सैनिक जोसेफ बड़ा की उपस्थिति में सरस्वती शिशु मंदिर पत्थलगांव में मनाया गया "कारगिल विजय दिवस "
पत्थलगांव -- सरस्वती शिशु मंदिर उ. मा.विद्यालय पत्थलगांव के सभाकक्ष में जोसेफ बड़ा भूत पूर्व सैनिक की उपस्थिति में 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया गया, सर्वप्रथम विद्या के देवी मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, संस्था के प्राचार्य पाढ़ी जी ने कारगिल विजय दिवस के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि कारगिल विजय हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है यह दिन 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत का प्रतीक है, यह दिन उन वीर शहीदों को याद करने का दिन है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, कारगिल युद्ध में कई वीरों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया, कैप्टन विक्रम बत्रा "शेरशाह " ने तिरंगा फहराया, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे परमवीर चक्र विजेता जिन्होंने अकेले दुश्मन के तीन बंकर उड़ाए,
ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव और राइफलमैन संजय कुमार इन्हें भी परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, 26 जुलाई 1999 को भारत ने सभी चोटियों पर फिर से कब्जा कर लिया पाकिस्तान की सेना को पीछे हटना पड़ा इसी दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में घोषित किया गया कारगिल विजय दिवस हमें सिखाता है कि देश की रक्षा के लिए किया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता, हम चैन से सोते हैं क्योंकि वो सीमा पर जागते हैं कारगिल विजय दिवस "साहस और बलिदान का प्रतीक " है आइये इस दिन हम सभी शहीदों को नमन करें, रमेश बड़ा भूतपूर्व सैनिक ने अपने सारगर्भित शब्दों में कहा मैं सैनिक रहते हुए सन 1975 से 1999 तक देश की रक्षा के लिए संघर्ष का सामना करते हुए जिम्मेदारी पूर्वक मैंने निष्ठा, लग्न, कर्तव्यनिष्ट होकर अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है, मैं शिशु मंदिर की शिक्षा और संस्कार से बहुत प्रभावित हूं,बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा अभी से आप लक्ष्य को चुने, उसके आधार पर आप निरंतर प्रयास करते रहें, तो निश्चित है आपको लक्ष्य की प्राप्ति होगी, प्राचार्य पाढ़ी जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया, वन्देमातरम उपरांत कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गई!




