झीरम घाटी नरसंहार कांड में NIA की विशेष कोर्ट ने हमले के गुनाहगारों को 15 मिनट में सुनाई फांसी की सजा
25 मई साल 2013 को झीरम घाटी हमले कांग्रेस की अग्रिम पंक्ति के नेता समेत कई सुरक्षाकर्मी हुवे थे शहीद
जगदलपुर। झीरम घाटी नरसंहार कांड में NIA की विशेष कोर्ट ने हमले के गुनाहगारों को फांसी की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 5 सितंबर को अपने फैसले में सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने यह फैसला सुनाने में महज 15 मिनट लिए। अदालत में सुबह दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। शाम 4:40 बजे जैसे ही 10 आरोपी कटघरे में पहुंचे, स्पेशल जज ने सख्त लहजे में आदेश दिया... दोषियों को गर्दन में फंदा लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उनकी मौत न हो जाए।
मृत्युदंड पाने वाले दोषियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। सभी दोषी वर्तमान में केंद्रीय कारागार में बंद हैं। इसके बाद दोषी 30 दिन के अंदर फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकते हैं।
आपको बता दें कि 25 मई साल 2013 को झीरम हमले कांग्रेस की अग्रिम पंक्ति के नेता समेत कई सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इस हमले को लेकर NIA कोर्ट ने 10 लोगों को दोषी करार दिया था। अदालत ने सभी दोषियों को 7 धाराओं में सजा ए मौत की सजा सुनाई है।
इसके अलावा हमले में मुख्य हमलावर दस्ते को बैकअप देने वाले, फोर्स की रेकी करने वाले 21 एरिया व एलजीएस कमांडर अब भी फरार चल रहे हैं। इन के खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट और रेड कॉर्नर नोटिस जारी हैं।
मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया। मामले में दोषी पाए गए 10 माओवादियों को जगदलपुर एनआईए अदालत द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।’’’
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस सजा को ‘‘अधूरा न्याय’’ करार दिया और कहा कि इस नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता अब भी आजाद घूम रहे हैं।



