छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, 22 आबकारी अधिकारी सस्पेंड, राज्य गठन के बाद सबसे बड़ा निलंबन की कार्रवाई
करोड़ों के घोटाले में कोर्ट में चालान पेश होते ही गिरी गाज, 90 करोड़ रुपए की अवैध वसूली
इस कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग ने 39 आबकारी अधिकारियों का तबादला
छत्तीसगढ़ सरकार ने 22 अबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सोमवार 7 जुलाई को 29 आबकारी अफसरों के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने विशेष कोर्ट में करीब 2300 पन्नों का चालान पेश किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2161 करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में बड़ा ऐक्शन लिया है। राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 वाणिज्य कर आबकारी अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है, जिसका आदेश आबकारी विभाग ने जारी किया है। जबकि शेष 7 अधिकारी पहले ही रिटायर हो चुके हैं।
सोमवार 7 जुलाई को 29 आबकारी अफसरों के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने विशेष कोर्ट में करीब 2300 पन्नों का चालान पेश किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसी आबकारी मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अभी रायपुर के केंद्रीय जेल में बंद हैं। लखमा पर प्रतिमाह 2 करोड़ रुपये प्रोटेक्शन मनी लेने का आरोप है।
बता दें कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और मुख्यमंत्री सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ आयकर विभाग ने 11 मई 2022 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी और अवैध दलाली का बड़ा नेटवर्क चल रहा है। इसमें रायपुर महापौर रहे एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के अवैध वसूली में शामिल होने का आरोप था।
ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया है कि साल 2019 से लेकर 2023 के बीच ये अधिकारी उन बड़े जिलों में पदस्थ या कार्यरत थे, जहां घोटाला हुआ। उन्होंने यहां करीब 90 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की है। वहीं, कुछ अधिकारी इस अवैध शराब बिक्री के लिए राज्य स्तर पर समन्वय का काम भी करते थे। अवैध ट्रांसपोर्टिंग करने के नाम पर भारी भरकम रिश्वत लेकर राज्य को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
15 जिलों में ऐसे पहुंच रही थी अवैध शराब
जांच के दौरान खुलासा हुइ की राज्य स्तर पर बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर 15 जिलों को चुना गया। ये वे जिले थे जिनमें देशी शराब की खपत अधिक थी। जहां शराब की खपत अधिक थी वहां आबकारी सिंडिकेट के निर्देश पर डिस्टिलरियों में अतिरिक्त शराब का निर्माण किया गया। फिर इनको ट्रकों में भरकर शराब सीधे चुने हुए जिलों के अधिक बिक्री वाली शराब दुकानों में भेजी जाती थी। इस तरह बिना किसी प्रकार का गवर्नमेंट ड्यूटी चुकाए, डिस्टलरी से वेयर हाउस लाई गई। फिर शासकीय डिपो से मांग के आधार पर दुकानों में लाई वैध शराब के समान कीमत पर बेची गई।
ये 22 अफसर हुए निलंबित
आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव, विकास गोस्वामी, नीतू नोतानी, दिनकर वासनिक, अनिमेष तेनाम, विजय सेन शर्मा, इकबाल खान, नितिन खंडूजा, नवीन प्रताप सिंह तोमर, मंजुश्री कसेर, सौरभ बख्शी, अशोक सिंह, गरीबपाल दर्दी, नोहर सिंह ठाकुर, सोनल नेताम, प्रमोद नेताम, मोहित जायसवाल, रविश तिवारी, रामकृष्ण मिश्रा, प्रकाश पाल और अलेख राम सिदार इसमें शामिल हैं। वहीं, ईओडब्ल्यू ने जिन 29 लोगों की लिस्ट दी है। उसमें से 7 रिटायर हो चुके हैं जबकि एक की बीमारी से मौत हो चुकी है।
याचिका के आधार पर ईडी ने 18 नवंबर 2022 को पीएमएलए एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि 2161 करोड़ रुपये का शराब घोटाला हुआ है। ईडी की चार्जशीट में बताया गया है कि कैसे अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के जरिए आबकारी विभाग में भारी भरकम भ्रष्टाचार हुआ। 2017 में आबकारी नीति में बदलाव कर सीएसएमसीएल के जरिए शराब बिक्री का प्रावधान किया गया, लेकिन 2019 के बाद अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को सीएसएमसीएल का एमडी नियुक्त करवाया और अधिकारियों, व्यापारियों व नेताओं के गठजोड़ से घोटाले को अंजाम दिया गया। अब तक तीन पूरक अभियोग पत्रों सहित कुल 4 चार्जशीट कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं। इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसीबी-ईओडब्ल्यू फिलहाल मामले की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारी होने की संभावना है।
इस कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग ने 39 आबकारी अधिकारियों का तबादला किया है। आधे से ज्यादा जिलों के अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में भेज दिया गया है। हालांकि आदेश में प्रशासनिक आधार पर सर्जरी करना बताया गया है। वाणिज्यिक कर विभाग ने नवा रायपुर ने आदेश जारी किया है।







