पत्थलगांव सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिक रही ब्रांडेड कम्पनी की नकली सिगरेट, लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर

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पत्थलगांव सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिक रही ब्रांडेड कम्पनी की नकली सिगरेट, लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर

पत्थलगांव सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिक रही ब्रांडेड कम्पनी की नकली सिगरेट, लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर

प्रशासन की उदासीनता और ढील के कारण दुकानदारों के हौसले बुलंद 



पत्थलगांव। पत्थलगांव सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बीते कई दिनों से नकली सिगरेट की बिक्री की बात सामने आ रही है। वहीं सम्बंधित विभाग के तरफ से इस पर कोई कार्रवाई या समय पर जांच नहीं की जाती है, जिसकी वजह से यहां डुप्लीकेट सिगरेट का व्यापार धड़ल्ले से फल फूल रहा है। इससे सरकार को टैक्स सहित आमजन के शरीर पर प्रभाव पड़ रहा है। इस नकली सिगरेट के बिक्री से छोटे दुकानदार को अधिक फायदा तो नही मिलता पर सिगरेट कम्पनियों के डीलरों व थोक विक्रेता को इसका काफी फायदा हो रहा है। 

बताया जा रहा है कि डुप्लीकेट सिगरेट ओरिजनल सिगरेट के जैसे ही दिखाई देती है, और अंदर डुप्लीकेट सिगरेट होती है। जिससे थोक विक्रेता ओरिजनल के साथ साथ आधे कीमतों पर मिलने वाली डुप्लीकेट सिगरेट को दुकानदार को थमा दिया जाता है। जिससे इनकी सिगरेट ओरिजनल कीमत पर ही बिक जाती है। सिगरेट के विभिन्न ब्रांडों में गोल्ड फ्लेक, फ्लेक लिबर्टी, गोल्ड फ्लेक इंडीमिंट, चार्म्स सहित अन्य ब्रांड के नकली भी मार्केट में उपलब्ध हैं। 

ये सिगरेट भारत में बनने वाली उम्दा सिगरेट के समकक्ष दिखती है, जबकि कीमत लगभग आधी या उससे कम पर बिकती है। चूंकि इस पर ओरिजनल की तरह ही एमआरपी लिखा होता है, लिहाजा दुकानदार ग्राहक को देखकर अलग-अलग रेट पर बेचते हैं। यह सिगरेट शहर की हर उस पान दुकान व किराना दुकान पर मिलती है, जो ठीक-ठाक चलती है।

वहीं तंबाकू पर 28 से 40 प्रतिशत जीएसटी दर करने से टैक्स में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि और नए एक्साइज ड्यूटी ढांचे ने सिगरेट के अवैध कारोबार बढ़ने का डर पैदा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स में इस बढ़ोतरी से अवैध कारोबार में वृद्धि हो सकती है। 35 प्रतिशत से ज्यादा की अप्रत्याशित बढ़ोतरी से कीमतों पर असर पड़ेगा। इससे अवैध व्यापार एवं उत्पादों की ओर लोगों का रुझान बढ़ेगा। इससे सरकार को टैक्स का नुकसान होगा। तंबाकू उपभोग में वैध सिगरेट की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत है, जबकि कुल टैक्स में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। ऐसे में अवैध सिगरेट को बढ़ावा मिलने से टैक्स का बड़ा नुकसान होगा। टेक्स के साथ साथ आम लोगों की सेहत पर भी सवाल खड़े करती है, नकली सिगरेट से कैंसर जैसी बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। 

टेक्स बढ़ने के बाद पहले वहीं 10 रुपये की सिगरेट अब 12-15 रुपये में मिल रही है। दुकानदारों ने अपनी मनमर्जी से कीमतें बढ़ाकर मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करे, तो यह बिक्री तुरंत बंद हो सकती है। लेकिन प्रशासन की उदासीनता और ढील के कारण दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं। 

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