छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव की हुई घोषणा, 26 मार्च से नामांकन प्रक्रिया होगी शुरू
भाजपा ने पैनल बनाकर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा नाम, वहीं कांग्रेस में अब तक केवल संभावित नामों को लेकर चर्चाएं
एक साल के बाद सदन की कार्रवाई में शामिल हुवे लखमा, कई नेताओं को लगाया गले
इस बार का बजट 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये से हो सकता है अधिक
छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हो चुकी है। 26 मार्च से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है। भाजपा की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में नवीन मार्कंडेय, कृष्णमूर्ति बांधी, किरण बघेल, गौरीशंकर अग्रवाल, प्रबल प्रताप जूदेव, सरोज पांडे और पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण सिंह चंदेल के नाम शामिल हैं।
पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए पैनल तैयार करते समय सामाजिक और जातिगत संतुलन को प्राथमिकता दी है। एससी वर्ग से नवीन मार्कंडेय, कृष्णमूर्ति बांधी और किरण बघेल को शामिल किया गया है। सामान्य वर्ग से गौरीशंकर अग्रवाल, प्रबल प्रताप जूदेव और सरोज पांडे को जगह मिली है, जबकि ओबीसी वर्ग से पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण सिंह चंदेल का नाम प्रस्तावित किया गया है। इससे साफ है कि भाजपा ने सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई है।
जहां भाजपा ने पैनल बनाकर केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है, वहीं कांग्रेस में अब तक केवल संभावित नामों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों की रणनीति और स्पष्ट होगी, जिसके बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।
एक साल के बाद सदन की कार्रवाई में शामिल हुवे लखमा, कई नेताओं को लगया गले
छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र की शुरुआत सोमवार से शुरू हुआ। सोमवार को बजट सत्र में एक अनोखा नजारा देखने को मिला। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में आरोपी बनाए गए पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस विधायक कवासी लखमा सोमवार को सालभर जेल में रहने के बाद पहली बार विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए। सदन में पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस और भाजपा विधायकों से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा विधायकों ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया, जिसकी चर्चा पूरे सदन में रही।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कवासी लखमा को कुछ शर्तों के साथ बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति दी है। उन्हें अंतरिम जमानत और संवैधानिक प्रावधानों के पालन की शर्त पर सदन में आने की इजाजत दी गई है। जिस मामले में उन्हें जमानत मिली है, उसकी जांच अभी जारी है।
नहीं दे सकेंगे भाषण
सत्र के दौरान कवासी लखमा किसी भी तरह का भाषण नहीं दे सकेंगे। वे अपने मामले से जुड़े किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी भी नहीं कर पाएंगे। उनकी उपस्थिति केवल बजट सत्र तक सीमित रहेगी और वे किसी अन्य कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
सत्र के दौरान उन्हें विधानसभा सचिव को अपने आने-जाने की पूरी जानकारी देनी होगी। नियमों का उल्लंघन होने पर दी गई अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है। हालांकि, उन्हें अपने हिस्से की चर्चा में भाग लेने की अनुमति दी गई है।
इस बार का बजट 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये से हो सकता है अधिक
इस बार का बजट 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। गौरतलब है कि वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ने 1 लाख 65 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इस बार के बजट में बस्तर क्षेत्र के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही शिक्षा, ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं।
विधानसभा में आज मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे वित्त मंत्री ओपी चौधरी वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। यह साय सरकार का तीसरा बजट होगा। बताया जाता है कि यह बजट सिर्फ वित्तीय आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि विजन 2047 की दिशा में ठोस कदम साबित होगा। महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने पर खास फोकस रहेगा। बजट सत्र की शुरूआत हो गई है, जो 20 मार्च तक चलेगा। इसमें कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं।
सत्र के दौरान तीन प्रमुख विधेयक पेश किए होंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 प्रमुख है। यह विधेयक 1968 के पुराने कानून को बदलकर जबरन मतांतरण पर कठोर सजा का प्रविधान करेगा। धोखाधड़ी या प्रलोभन के मामलों में 10 साल तक की जेल का प्रविधान किया जा सकता है।राज्य सरकार ने ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित नौ राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर इसका मसौदा तैयार किया है।



