जेल बंदियों के मानवीय अधिकारों और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में जेल प्रबंधन ने उठाया बड़ा कदम
राज्य के सभी 33 जेलों में वीडियो एवं ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित करने को लेकर हुवा समझौता
जेल बंदियों के मानवीय अधिकारों और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में जेल प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाया है। जेल मुख्यालय और भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के बीच राज्य की सभी 33 जेलों में वीडियो एवं ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित करने को लेकर एमओयू हुआ।
उप मुख्यमंत्री सह जेल मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर शुरू की गई इस पहल से अब बंदी वीडियो कॉल के जरिए स्वजन और अधिवक्ताओं से बात करने के अलावा उन्हें देख भी सकेंगे। यह सुविधा बंदियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने और उनके सामाजिक पुनर्वास में अहम भूमिका निभाएगी।
प्रत्येक बंदी को सप्ताह में एक बार पांच मिनट के लिए यह सुविधा मिलेगी। सजायाफ्ता कैदी जेल में काम करते हैं। इसके एवज में उन्हें निर्धारित पारिश्रमिक मिलता है, जो उनके अकाउंट (केवल जेल उपयोग के लिए) में जमा होता है। वहीं अन्य कैदियों का भी इसी तरह का अकाउंट रहता है।
फिलहाल प्रदेश की केवल 17 जेलों में ऑडियो कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध है। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह सुविधा सभी जेलों तक विस्तारित होगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कैदी केवल पूर्व निर्धारित नंबरों पर ही कॉल कर सकेंगे।
जेल अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के कारण बंदियों में तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वीडियो कॉलिंग जैसी तकनीक उन्हें भावनात्मक सहारा देगी और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होगी।
नई व्यवस्था के तहत ऑडियो कॉल के लिए एक रुपये प्रति मिनट और वीडियो कॉल के लिए पांच रुपये प्रति मिनट का शुल्क निर्धारित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश की जेलों में 22 हजार से अधिक कैदी निरुद्ध हैं, जिन्हें इस सुविधा का लाभ मिलेगा। प्रत्येक बंदी को सप्ताह में एक बार पांच मिनट तक इस सुविधा का उपयोग करने की अनुमति होगी। सजायाफ्ता कैदियों को जेल में किए गए कार्य के बदले पारिश्रमिक मिलता है, जो उनके जेल खाते में जमा होता है। इसी राशि से वे कॉलिंग सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।
इसी बीच राज्य में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए 10 कैदियों को समय से पहले रिहा किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंजूरी और राज्य दंडादेश पुनर्विलोकन बोर्ड की सिफारिश पर यह निर्णय लिया गया। रायपुर, दुर्ग और अंबिकापुर सेंट्रल जेल में हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे इन कैदियों ने 14 वर्ष से अधिक समय जेल में बिताया था।
जेल प्रशासन के अनुसार, उनके अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें रिहाई का लाभ दिया गया, जो उनके जीवन में नई शुरुआत का अवसर साबित होगा। यह पूरी पहल राज्य की जेल व्यवस्था को अधिक मानवीय, तकनीकी रूप से सक्षम और सुधारात्मक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा, बल्कि समाज में उनके पुनर्स्थापन की प्रक्रिया भी मजबूत होगी।



