अशासकीय स्कूलों की फीस बढ़ोतरी एवं पुस्तक-गणवेश खरीद की शिकायतों के निराकरण हेतु निगरानी एवं जांच समितियों का गठन
ग्रीष्मकालीन अवकाश में विद्यार्थियों के लिए समर कैम्प आयोजित करने के निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अशासकीय विद्यालयों में फीस वृद्धि तथा पुस्तक, गणवेश एवं शैक्षणिक सामग्री खरीद को लेकर प्राप्त शिकायतों के त्वरित निराकरण हेतु जिला एवं विकासखंड स्तर पर निगरानी एवं जांच समितियों का गठन किया गया है। शासन के संज्ञान में यह बात आई है कि प्रदेश में संचालित कुछ अशासकीय विद्यालयों द्वारा पालकों को पुस्तक, गणवेश एवं अन्य सामग्री किसी एक विशेष फर्म से खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे पालकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ रहा है। इस संबंध में समाचार पत्रों में भी लगातार शिकायतें प्रकाशित हो रही थीं।
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह ने बताया कि इन्हीं शिकायतों के प्रभावी एवं त्वरित निराकरण के उद्देश्य से जिला स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है, जिसमें कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी तथा सहायक आयुक्त जीएसटी को शामिल किया गया है। वहीं विकासखंड स्तर पर जांच दल समिति में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा जीएसटी इंस्पेक्टर को सदस्य बनाया गया है।
इसके साथ ही अशासकीय विद्यालयों में फीस बढ़ोतरी से संबंधित शिकायतों पर भी स्वतः संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक-2020 के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रीष्मकालीन अवकाश में विद्यार्थियों के लिए समर कैम्प आयोजित करने के निर्देश
शिक्षकों एवं पालकों के सहयोग रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त कलेक्टरों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास हेतु समर कैम्प आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रदेश के विद्यालयों में 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश प्रभावी है। इस अवधि में बच्चों को रचनात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी प्रतिभा को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों में रचनात्मक गतिविधियों के आदान-प्रदान में पालकों एवं शिक्षकों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी।
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह द्वारा जारी निर्देश के अनुसार समर कैम्प का आयोजन विद्यालयों अथवा गांव एवं शहरों के सामुदायिक स्थलों पर किया जा सकेगा। समर कैम्प में कला एवं रचनात्मक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित कर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को निकटस्थ औद्योगिक संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों एवं अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया जा सकेगा। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु शिक्षकों एवं पालकों का सहयोग भी लिया जाएगा। समर कैम्प में चित्रकारी, गायन-वादन, निबंध एवं कहानी लेखन, हस्तलिपि लेखन, नृत्य, खेलकूद तथा अपने गांव अथवा शहर के ऐतिहासिक परिचय जैसी विविध रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। स्थानीय आवश्यकताओं एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अन्य नवाचार गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकेगा।
विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि समर कैम्प का आयोजन पूर्णतः स्वैच्छिक होगा तथा इसका संचालन प्रतिदिन प्रातः 7.30 बजे से 9.30 बजे के मध्य किया जाएगा। आयोजन से पूर्व शाला विकास समिति एवं पालक-शिक्षक समिति से सहमति प्राप्त करना आवश्यक होगा। कार्यक्रम में जनसहयोग को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि समर कैम्प आयोजन हेतु पृथक बजट उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। अतः जिला स्तर पर उपलब्ध संसाधनों एवं सामुदायिक सहयोग के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया गया है। साथ ही ग्रीष्मकालीन प्रायोजना कार्यों को शिक्षक एवं पालकों के सहयोग से विद्यार्थियों द्वारा पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए समर कैम्प की अवधि निर्धारित करने अथवा आवश्यकता पड़ने पर इसे स्थगित करने का अधिकार संबंधित जिला कलेक्टर को प्रदान किया गया है। विभाग ने ग्रीष्मकालीन अवकाश को दृष्टिगत रखते हुए बच्चों के सीखने, रचनात्मकता एवं व्यक्तित्व विकास के अवसर के रूप में उपयोग करते हुए व्यापक स्तर पर समर कैम्प आयोजित किए जाएंगे तथा आयोजित गतिविधियों की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।



