पत्थलगांव में आदिवासी जमीन विवाद गहराया: बरगलाकर कराई जा रही रजिस्ट्री के आरोप,
सड़कों पर उतरा समाज,तहसील कार्यालय का किया घेराव, रातों रात फेरबदल करने का लगाया आरोप
दलालों को अधिकारी एवम पटवारियों से ज्यादा रहती है आदिवासी जमीनों की जानकारी
पत्थलगांव। पत्थलगांव क्षेत्र में आदिवासी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। सोमवार को सैकड़ों आदिवासी समाज के लोगों ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार जयश्री राजन पथे को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नामचीन जमीन के दलालों द्वारा आदिवासी जमीन का नक्शा हेरफर कर नियमों का दुरुपयोग कर आदिवासियों की जमीनों को अपने करीबी आदिवासी के नाम किया जा रहा है। रैली के दौरान आदिवासियों का शोषण बंद करो और जमीन दलालों पर कार्रवाई करो,जैसे नारे गूंजते रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में आदिवासियों को बरगलाकर प्रभावशाली लोगों द्वारा अपने करीबी आदिवासी व्यक्तियों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराई जाती है, और बाद में उस जमीन पर वास्तविक नियंत्रण रसूखदारों का ही रहता है। इसे उन्होंने एक सुनियोजित साजिश बताते हुए आदिवासी अधिकारों का हनन बताया।
रायगढ़ रोड स्थित चिड़रापारा वार्ड क्रमांक 07 और 08 की जमीनों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से नक्शों में हेरफेर, फर्जी नामांतरण और जमीन विक्रय का खेल लंबे समय से चल रहा है। कलेक्टर को शिकायत देने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। वहीं इनका कहना है कि कई बार आवेदन देने के बाद भी जमीन के नक्शा, नामांतरण, रजिस्ट्री लगातार हो रहे है। आखिर क्या कारण है कि इन दलालों पर अधिकारी इनपर मेहरबान रहते है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर रजिस्ट्री कराई गई, यहां तक कि मृत व्यक्तियों के नाम पर भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का हस्तांतरण किया गया। सरकारी और सड़क किनारे की जमीनों की बिक्री के आरोप भी सामने आए हैं।
ग्रामीणों ने बकायदा नेता कम जमीन दलालों का नाम लेकर कहा कि नेतागिरी कर भू-माफियाओं और राजस्व अमले की कथित साठगांठ से बड़ी संख्या में आदिवासी जमीनें गैर-आदिवासियों के कब्जे में चली गई हैं।
इस पूरे मामले पर तहसीलदार जयश्री राजनपथे ने कहा कि उन्हें शिकायतें मिल रही हैं और हर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रकार की गलत रजिस्ट्री सामने आती है तो उसे निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
दलालों को अधिकारी एवम पटवारियों से ज्यादा रहती है आदिवासी जमीनों की जानकारी
वहीं प्रदर्शनकारियों के कहना था कि इन दलाल नुमा व्यक्तियों को आदिवासी जमीनो की जानकारी अधिकारियों से भी अधिक रहती है। उन्हें जमीन का रकबा खसरा नम्बर तो मुह जुबानी याद रहती है कहां पर कितनी जमीन है। एवम अधिकारियों पटवारियों से सांठगांठ कर जमीनों को फर्जी ढंग से विक्रय कर दिया जाता है। कई बार तो जमीन मालिक को पता ही नही रहता कि उसकी जमीन की बिक्री हो गई है। वहीं दलालो द्वारा विभाग के सम्बंधित अधिकारी व पटवारियों से सांठगांठ कर रातों रात जमीन के नक्शे को उलटफेर करने का भी आरोप लगया।
फिलहाल, क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है और आदिवासी समाज ने जल्द न्याय नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।









