भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में कई नए चेहरों को किया गया शामिल, पुराने कई दिग्गजों को किया इससे बाहर
अनुभवी नेताओ को कोर ग्रुप से बाहर करना कर रही भाजपा की आंतरिक कलह को उजागर- दीपक बैज
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा की दो दिवसीय मैराथन बैठक के पहले कोर ग्रुप में हुए बदलाव ने प्रदेश का सियासी पारा गरमा दिया है। भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में कई नए चेहरों को शामिल किया गया है जबकि बृजमोहन अग्रवाल, रामविचार नेताम, गौरीशंकर अग्रवाल, पुन्नूलाल मोहले, रेणुका सिंह और विक्रम उसेंडी जैसे कई दिग्गजों को इससे बाहर कर दिया गया है। वहीं, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री ओपी चौधरी, पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, लता उसेंडी और पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा को कोर ग्रुप में जगह दी गई है। इस बदलाव पर कांग्रेस ने तंज कसा और भाजपा के भीतर गुटबाजी से जोड़ा, तो दूसरी ओर भाजपा इसे संगठन की नियमित प्रक्रिया बताई।
छत्तीसगढ़ बीजेपी में हुए इस बड़े बदलाव को जहां पीढ़ीगत बदलाव माना जा रहा है, तो वहीं कुछ लोग इसे कोरग्रुप में अनुभव और ऊर्जा का समावेश मान रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से बृजमोहन अग्रवाल का जिक्र करते हुए कहा कि इतने अनुभवी नेता को कोर ग्रुप से बाहर करना भाजपा की आंतरिक कलह को उजागर करता है।
कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भाजपा में कोर कमेटी में शामिल करना या बाहर करना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय तक इस समिति का हिस्सा रहे हैं और जब तक सक्रिय राजनीति में हैं, कोई उन्हें हाशिए पर नहीं डाल सकता।
भाजपा में कोर कमेटी से दिग्गजों को बाहर करने के बाद बुधवार को प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक में 23 विधायकों को सदस्य न बनाए जाने पर नया विवाद शुरू हो गया है। भाजपा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रदेश कार्यसमिति सदस्य की टीम में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नहीं रखा गया है। राष्ट्रीय परिषद में सभी विधायकों को सदस्य बनाया जाता है। भाजपा के 54 विधायक हैं।
भाजपा संगठन की परिपाटी के अनुसार सभी विधायक प्रदेश कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए जाते हैं। लेकिन किरण देव की नई टीम में 14 मंत्री और 17 विधायकों को ही जगह दी गई। बाकी विधानसभा के सचेतक सुशांत शुक्ला, पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े, अनुज शर्मा, ललित चंद्राकर, धर्मजीत सिंह, ईश्वर साहू, प्रबोध मिंज जैसे 23 विधायकों को जगह नहीं दी गई। बुधवार को बैठक जैसे शुरू हुई तो यह चर्चा का विषय बन गया। क्योंकि जिस बैठक में महापौर, जिला प्रभारी, निगम-मंडल के अध्यक्षों को बुलाया गया हो वहां 23 विधायकों का न पहुंचना बड़ी राजनीति का केंद्र बन गया।
जून में मिल जाएगा नया प्रभारी
नई प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की बैठक में पहली बार ऐसा हुआ कि प्रदेश प्रभारी मौजूद नहीं रहे। बता दें कि छत्तीसगढ़ के प्रभारी नितिन नबीन 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। अभी उनके पास छत्तीसगढ़ का प्रभार भी है। अब यह बताया जा रहा है कि इसी महीने राष्ट्रीय कार्यकारिणी तैयार हो जाएगी। संभावना है कि जून तक छत्तीसगढ़ को नया प्रभारी मिल जाए।
पीएम का आवाहन नहीं आया काम
डीजल-पेट्रोल संकट को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के आवाहन पर सभी मंत्री अपने कारकेड से गाड़ियां कम कर रहे हैं। लेकिन वहीं भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हजारों गाड़ियां कार्यालय आईं। इसमें कुछ पदाधिकारी तो दो-तीन वाहनों को साथ लेकर आए। बैठक के दौरान कई लोगों ने इस मुद्दे को भी उठाया कि इस बैठक को वर्चुअल भी किया जा सकता था।



