छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न निगम, मंडल और आयोगों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों को मिला कैबिनेट मंत्री एवं राज्य मंत्री का दर्जा
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने प्रदेश के विभिन्न निगम, मंडल और आयोगों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री एवं राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत की ओर से गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिसके तहत कुल 18 विभिन्न संस्थाओं के प्रमुखों को यह विशिष्ट दर्जा दिया गया है। आदेश के अनुसार यह दर्जा संबंधित पदाधिकारियों को शिष्टाचार के लिए प्रदान किया गया है और आदेश जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा।
आदेश में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि यह सूची किसी प्रकार की वरिष्ठता या आधिकारिक प्रोटोकॉल की स्थिति को नहीं दर्शाती है, बल्कि यह प्रशासनिक कामकाज के सुचारू संचालन के लिए दी गई है।
केबिनेट मंत्री का दर्जा
रामलाल चौहान, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग
रूप सिंह मंडावी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग
डॉ. ममता साहू, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग
इन्हें राज्य मंत्री का दर्जा
गौरीशंकर श्रीवास, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड
आनंद निषाद, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड
राजेश कुमार राजपूत, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मंडल
राजेंद्र नायक, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य शाकंभरी बोर्ड
सुधीर गौतम अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग
एजाज मिर्जा बेग, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी
भोजराज देवांगन, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ
प्रभात मिश्रा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य राजभाषा आयोग
सुषमा जेठानी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य सिंधी अकादमी
शशिकांत द्विवेदी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ
इन उपाध्यक्षों को भी राज्य मंत्री का दर्जा
डॉ. जेपी शर्मा, उपाध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण
किशोर महानंद, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल
आनंद कुमार तिवारी राजीव लोचन दास महाराज, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग
वेदराम मनहरे, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग
मंगलदास ठाकुर, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग
छत्तीसगढ़ में निगम, मंडल और आयोगों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों को मंत्री का दर्जा दिए जाने का प्रावधान मुख्य रूप से शिष्टाचार और प्रोटोकॉल से जुड़ा होता है। यह नहीं होता कि संबंधित पदाधिकारी को वास्तविक रूप से मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया है।राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों को उनके पद की गरिमा और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनुरूप कैबिनेट मंत्री या राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान करती है।



