निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद, संचालक कई वर्षों से राशि बढ़ाने की कर रहे मांग
आरटीई मामले में राज्य सरकार ने मामले के समाधान के लिए किया एक उच्च स्तरीय समिति का गठन
छत्तीसगढ़ में आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस बीच राज्य सरकार ने मामले के समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि की समीक्षा करेगी और नई दरों को लेकर सुझाव देगी। निजी स्कूल संचालक कई वर्षों से राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। सरकार के इस कदम से स्कूलों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं अभिभावकों और छात्रों की भी इस पर नजर बनी हुई है।
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि राज्य में पिछले 14 वर्षों से आरटीई के तहत प्रतिपूर्ति राशि मात्र 7 हजार रुपये प्रति छात्र प्रतिवर्ष निर्धारित है। इस दौरान शिक्षा की लागत, शिक्षकों का वेतन, भवन रखरखाव और अन्य खर्चों में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया।
प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान राशि वास्तविक खर्च के मुकाबले बहुत कम है। स्कूल संचालक प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 18 हजार से 30 हजार रुपये प्रति छात्र प्रतिवर्ष करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे आरटीई के तहत अध्ययनरत छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
मामला न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा था कि पिछले कई वर्षों से प्रतिपूर्ति राशि में संशोधन क्यों नहीं किया गया। अदालत की इस टिप्पणी के बाद सरकार पर मामले के समाधान का दबाव और बढ़ गया था।
प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाए जाने से नाराज निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने पर आपत्ति जताई थी। कुछ स्कूलों ने नए प्रवेश रोकने की भी चेतावनी दी थी, जिससे अभिभावकों और छात्रों की चिंता बढ़ गई थी।
हालांकि बाद में छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बावजूद स्कूल संचालक अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं और प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति वर्तमान प्रतिपूर्ति व्यवस्था, स्कूलों के खर्च, अन्य राज्यों के मॉडल और वित्तीय प्रभाव का अध्ययन करेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार नई प्रतिपूर्ति राशि तय कर सकती है।
अब निजी स्कूल संचालकों, अभिभावकों और आरटीई के तहत अध्ययनरत छात्रों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद प्रतिपूर्ति राशि को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है, जिससे लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिपूर्ति राशि में यथार्थवादी बढ़ोतरी की जाती है तो इससे निजी स्कूलों पर वित्तीय दबाव कम होगा और आरटीई के तहत पढ़ने वाले छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में संतुलन और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।



