ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल योजना बनी शो पीस, क्षेत्र में बनी टंकीयां आज खुद ही पानी के लिए रही तरस
2 वर्षों बाद भी घरों में लगे नल से जीवन देने वाला जल अब भी कल के इंतजार में
11 हजार करोड़ से ऊपर खर्च के बावजूद छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय रैंकिंग में 23वें स्थान पर
पत्थलगांव । सरकारें चाहे कितने भी वादे कर ले परंतु हमेशा जमीनी हकीकत कुछ अलग ही बयां करते नजर आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे नल जल योजना के तहत घरों में लगाए गए नल से एक बूंद पानी के लिए लोग अब तक तरस रहे हैं। जबकि नल को लगाए कई स्थानों पर लगभग 2 वर्ष से अधिक बीत चुके हैं पर पानी के नाम पर अभी तक नल से एक बूंद पानी भी नहीं निकला है, जिसकी वजह से पीने के स्वच्छ जल को ग्रामीण परेशान नजर आ रहे हैं। खासकर गर्मी के मौसम में जब जल स्त्रोत नीचे चला जाता है तो ग्रामीणों को पीने के पानी के लिये काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बताते चलें कि छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन तय समय-सीमा से पिछड़ गया है। मिशन की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को हुई थी। इसका मूल लक्ष्य दिसंबर 2024 तक प्रदेश के करीब 50 लाख ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाना था। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर मिशन की समय-सीमा अब बढ़ाकर 2028 कर दी गई है। मार्च 2024 तक राज्य में योजना पर 11हजार34 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके थे।
इसके बावजूद हर घर तक नियमित जलापूर्ति का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। राज्य में करीब 39 लाख यानी 78% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हाल में जारी कैग रिपोर्ट ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई गांवों को पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित किए बिना ही ‘हर घर जल’ घोषित कर दिया गया।
गांवों में पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए महज शो पीस से ज्यादा कुछ नहीं है। पानी की टंकी ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए बनीं थी, लेकिन आज खुद ही पानी के लिए तरस रही है। जिसके कारण लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंचा। क्षेत्र के गांवों में लोगों के घरों तक पाइप लाइन बिछाकर नल के कनेक्शन भी लगाए गए हैं। लेकिन पानी की टंकी सूखी होने के कारण पानी की जगह सिर्फ हवा ही लोगों के घरों तक पहुंच रही है। जिससे क्षेत्र के कई गांवों में आज भी पीने का साफ पानी नहीं पहुंचा है। जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पानी की टंकियां और नल कनेक्शन तो आ गई हैं। लेकिन यहां जीवन देने वाला जल अब भी कल के इंतजार में है।
लाखों रुपए खर्च करके पानी की टंकी गांव के सीने में खड़ी कर दी गई है, लेकिन ये टंकी सिवाए शो पीस के कुछ नहीं। क्योंकि ये टंकी ग्रामीणों को रोजाना सुबह से लेकर शाम तक सिवाए चिढ़ाने के कुछ नहीं करती। टंकी ये बताने की कोशिश कर रही है कि देखों कथनी और करनी में कितना अंतर है। मैं बनीं तो थी दूसरों के प्यास को बुझाने के लिए लेकिन हालात ये है कि मैं खुद ही प्यासी हूं, इसलिए मेरे साथ पूरा गांव पानी के लिए तरस रहा है। राज्य के बस्तर और सरगुजा के जनजातीय क्षेत्रों के साथ बालोद-दुर्ग जैसे भू-जल समस्या वाले इलाकों में भी जलस्रोतों की स्थिरता चुनौती बनी हुई है।
अभी तक 78% कनेक्शन का आंकड़ा पाइप और नल बिछाने की प्रगति दिखाता है, लेकिन नियमित जलापूर्ति की स्थिति अब भी चुनौती है। इसी वजह है कि 11034 करोड़ खर्च के बावजूद छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय रैंकिंग में 23वें स्थान पर है।
33 में एक भी जिला 100% कवरेज नहीं कर पाया
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट मार्च 2024 को समाप्त अवधि की है। विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2024 तक 33 जिलों या 146 विकासखंडों में सभी ग्रामीण परिवारों को शत-प्रतिशत क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
हर घर नल से जल पहुंचाना अब कलेक्टरों की सीधी जिम्मेदारी होगी, योजना का भौतिक सत्यापन जरूरी
जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के काम में अब कलेक्टरों को व्यक्तिगत रुचि लेकर मॉनिटरिंग करनी होगी। मुख्य सचिव विकासशील ने महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में मिशन की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने साफ कहा कि जल जीवन मिशन के कार्यों में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, उनका भौतिक सत्यापन कराया जाए। पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान भी जल्द निपटाए जाएं। जिन योजनाओं में जल स्रोत की समस्या है, उन्हें स्थानीय निधि से पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
जहां सब इंजीनियरों की कमी है, वहां दूसरे विभागों के इंजीनियरों की सेवाएं लेकर काम आगे बढ़ाया जाए। स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और विभागों के प्रभावी समन्वय से मिशन मोड में काम किया जाए, ताकि प्रदेश के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध तरीके से नल से पानी मिल सके।




