छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने बस सेवा को बंद करने का किया ऐलान, 22 सितंबर से करना पड़ सकता है मुश्किलों का सामना
डीजल की बढ़ती कीमतों के बावजूद बस किराया नहीं बढ़ाए जाने से नाराज बस ऑपरेटरों ने दी हड़ताल की चेतावनी, रखी 9 सूत्रीय मांगें
रायपुर। अगर आप बस से ही आना जाना करते हैं तो 22 सितंबर से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने बस सेवा को बंद करने का ऐलान कर दिया है। प्रदेश में डीजल की बढ़ती कीमतों के बावजूद बस किराया नहीं बढ़ाए जाने से नाराज बस ऑपरेटरों ने हड़ताल की चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली ने बताया कि मांगें पूरी न होने पर 22 तारीख से राज्यभर में यात्री बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। बस मालिकों ने 9 सूत्रीय मांगें रखी है।
क्या हैं बस संचालकों की 9 मांगें?
यात्री किराया बढ़ाया जाए।
बसों में सिंगल स्लीपर का सिंगल टैक्स लिया जाए।
ई-बस को शहर सीमा के भीतर चलाया जाए।
ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की बसों को ग्रामीण क्षेत्र व बस स्टैंडों से संचालन प्रतिबंधित किया जाए।
स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में दो बसों के मध्य अंतराल का निर्धारण किया जाए।
VLTD डिवाइस के रिन्यूअल की दर में कमी कराई जाए।
मैनुअल फिटनेस प्रदान किया जाए।
प्रतिहस्ताक्षर को नियंत्रित किया जाए।
सभी बसों में ऑनलाइन परमिट बनाने की सुविधा दी जाए।
महासंघ के अध्यक्ष के मुताबिक, पिछले तीन साल से अधिकारियों ने बस ऑपरेटरों के साथ बैठक नहीं की है। किराया बढ़ाने का प्रस्ताव चार महीने पहले भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली ने आरोप लगाया कि बस संचालक लंबे समय से अपनी समस्याएं सरकार और परिवहन विभाग के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि करीब तीन साल से अधिकारियों ने महासंघ के साथ कोई बैठक नहीं की है। हड़ताल होने पर रोजाना बसों से सफर करने वाले हजारों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल और बस संचालन से जुड़े अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि किराए में लंबे समय से बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में मौजूदा किराए पर बसों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है।




