छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अधिनियम किया लागू, व्यापमं का अस्तित्व हुवा समाप्त
तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता लाना उद्देश्य
रायपुर। राज्य में सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अधिनियम लागू कर दिया है। इस नए कानून के साथ ही वर्तमान में कार्यरत छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) का अस्तित्व समाप्त हो गया है और इसका विलय नए गठित मंडल में कर दिया गया है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल अधिनियम, 2026 को प्रभावी करते हुए विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने गजट नोटिफिकेशन कर दिया है। जारी राजपत्र में लिखा है,तकनीकी और गैर-तकनीकी तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए अभ्यर्थियों की चयन प्रक्रिया में एकरूपता लाने, अन्य परीक्षाओं, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, प्रवेश परीक्षाओं, और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल का गठन करने हेतु अधिनियम। यह अधिनियम छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल अधिनियम, 2026 कहलाएगा। इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य पर होगा। यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे। यह मंडल न केवल सरकारी विभागों, बल्कि वैधानिक निकायों, मंडलों और प्राधिकरणों के लिए भी सीधी भर्ती की परीक्षा, साक्षात्कार और कौशल परीक्षण का आयोजन करेगा।
इस अधिनियम के प्रावधान राज्य सरकार के समस्त विभागों के लिए धारा 2 के खंड (घ) एवं (ङ) के अंतर्गत अधिसूचित तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के समस्त पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया पर लागू होंगे, जिनमें वैधानिक निकाय, मण्डल, प्राधिकरण अथवा ऐसे अन्य संस्थान भी सम्मिलित होंगे, जिन्हें राज्य सरकार समय-समय पर अधिसूचित करे।
विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने कर्मचारी चयन मंडल के गठन को लेकर राजपत्र में प्रकाशन कर दिया है। राज्यपाल के हस्ताक्षर से जारी गजट नोटिफिकेशन में छत्तीसगढ़ में कर्मचारी चयन मंडल के गठन की घोषणा कर दी है। कर्मचारी चयन मंडल के अस्तित्व में आते ही व्यावसायिक परीक्षा मंडल को समाप्त कर दिया जाएगा। व्यापमं की परिसंपत्तियो कर्मचारी चयन मंडल में समाहित कर दी जाएंगी।
कर्मचारी चयन मण्डल, तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया का आयोजन करेगा, जिसमें परीक्षा, साक्षात्कार, कौशल परीक्षण अथवा कोई अन्य प्रक्रिया शामिल है तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश, व्यावसायिक योग्यता की प्राप्ति तथा किसी अन्य परीक्षा, जैसा कि राज्य शासन द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाए, का संचालन भी करेगा।
साथ ही भर्ती के अलावा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी यही मंडल परीक्षाएं आयोजित करेगा। अधिनियम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मंडल निधि का प्रावधान किया गया है, जिसका हर साल ऑडिट किया जाएगा। साथ ही, यदि कोई अभ्यर्थी परीक्षा में अनुचित साधनों (नकल) का प्रयोग करता है या व्यवधान डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए नियम भी मंडल को दी गई है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की कमान यानी अध्यक्ष का पद प्रमुख सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाएगी। मंडल में तीन सदस्य (संयुक्त सचिव स्तर) और एक सचिव (उप सचिव स्तर) शामिल होंगे। परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष परीक्षा नियंत्रक की तैनाती भी की गई है। वरिष्ठतम स्तर का अधिकारी अध्यक्ष होने से प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर वितरण तक की गोपनीयता की निगरानी और भी सख्त होगी।
जिलों के कलेक्टर्स और एसपी के साथ समन्वय अब और भी बेहतर होगा, जिससे ‘जीरो एरर’ परीक्षा का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। नए नियम के मुताबिक अब अब एक ही छत के नीचे होंगी सारी भर्तियां होंगी। सरकार के पास अब यह शक्ति होगी कि वह कई विभागों के लिए एक ही ‘संयुक्त चयन परीक्षा’ आयोजित कर सके। वहीं व्यापमं की सभी संपत्तियां, रिकॉर्ड और कर्मचारी अब नए ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ के अधीन कार्य करेंगे।
सरकार, कार्यालय व्यय, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों तथा भर्ती प्रक्रिया के संचालन के दौरान होने वाले व्ययों की पूर्ति के लिए मण्डल को आवश्यकतानुसार निधि उपलब्ध कराएगी।
मण्डल का सचिव, आहरण एवं संवितरण अधिकारी होगा। मण्डल निधि में जमा की गई समस्त धनराशि ऐसे बैंक में जमा की जाएगी, जैसा कि मण्डल द्वारा निर्धारित किया जाए। मण्डल, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित मण्डल निधि का उपयोग कर सकेगा। मण्डल, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए मण्डल की अनुमानित प्राप्तियों एवं व्ययों को दर्शाते हुए एक बजट तैयार करेगा। मण्डल के लेखों का प्रतिवर्ष विहित रीति से लेखा परीक्षण किया जायेगा।



